मल्लिकार्जुन खड़गे के घर विपक्ष की संसद: मीरा कुमार स्पीकर बनीं, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आया; 6 आरोप लगाए, तीन मांगें रखीं
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नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्ष ने संसद की नकल करते हुए CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पेश किया। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन शनिवार (31 अक्टूबर) को एक नए रुप में नजर आया। विपक्ष ने कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर संसद की नकल करते हुए सेट-अप तैयार किया और फिर संसद की तरह ही कार्यवाही भी शुरू हुई।
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश किया और बारी-बारी से सभी दलों के लीडर ने इस प्रस्ताव के पक्ष में अपनी बात रखी। पूरा इवेंट हूबहू संसद की कार्यवाही की नकल रहा। डेस्क, चेयर से लेकर माइक और स्क्रीन तक, सब कुछ संसद की कॉपी करते हुए रखे गए।
स्पीकर के पद पर पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बैठाया गया। अंतर बस यह रहा कि यह संसद से कुछ किलोमीटर दूर और सत्तापक्ष की गैर मौजूदगी में हुआ। फर्क यह भी रहा कि इस इवेंट में कुछ स्टूडेंट लीडर्स, सोशल वर्कर और वे लोग भी शामिल हुए, जिनके नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिए गए।
विपक्ष ने क्यों बनाई अपनी संसद?
यह विरोध का अपना अलग तरीका है। विपक्ष इससे दो बातें देश के सामने रखना चाहता है। पहला यह कि संसद में हमारी बात नहीं सुनी जाती, इसलिए मॉक पार्लियामेंट बनाकर हम अपनी बात रख रहे हैं। और दूसरी यह कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनाव से लेकर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के पर्याप्त सबूत हैं और उन्हें हटाया ही जाना चाहिए।
खड़गे ने पेश किया प्रस्ताव, 6 आरोप लगाए
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की स्पीच से मॉक पार्लियामेंट का सेशन शुरू हुआ। उन्होंने अपने लंबे-चौड़े भाषण में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। खड़गे ने इस दौरान 6 बड़े आरोप लगाए। इनमें चुनाव चुराने की साजिश, 13.2 करोड़ वोटर्स के नाम डिलीट करना, संसद की निगरानी या जानकारी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव, सॉफ्यवेयर के जरिए मतदाता सूचियों पर कब्जा करना, दोनों चुनाव आयुक्तों को फैसलों से बाहर रखना और मोदी और शाह के इशारे पर काम करने जैसे आरोप शामिल हैं।
खड़गे ने अपनी स्पीच के दौरान विपक्ष की तीन मांगे भी रखीं। उन्होंने कहा- ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए, SIR फौरन रद्द हो और चुनाव आयुक्तों को चुनने की प्रोसेस को बदलने वाला 2023 का कानून रद्द हो।

सांसद-एक्टिविस्टों ने प्रस्ताव के समर्थन में रखी अपनी बात
TMC सांसद सागरिका घोष ने कहा कि 2026 का बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट चोरी हुई और इसी के जरिए BJP को वहां जीत मिली।
CPI सांसद पी संतोष कुमार ने कहा- देश में लोकतंत्र कायम रखने के लिए ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों को जाना होगा।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा- लोकतंत्र को बर्बाद करने के लिए SIR की साजिश रची गई। जिन लोगों ने इस देश के लोगों की इज्जत नहीं की उन्हें सिर्फ महाभियोग से नहीं हटाया जाएगा बल्कि सलाखों के पीछे भी डाला जाएगा।
इसी तरह तमाम बड़े लीडर्स ने अपनी बातें रखीं।
डिलीट वोटर्स भी आए
दिल्ली की अनीता जायसवाल ने कहा- मैं सिंगल मदर हूं। मेरे पास हमेशा से वोटर आईडी कार्ड रहा है। इसी के जरिए मैंने आधार कार्ड बनवाया। लेकिन अब मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है।
बंगाल के इफ्तिकार ने बताया- मेरे पिता 50 साल से वोट दे रहे थे। मेरा भी वोटर आईडी कार्ड है। मेरे पास सारे डॉक्युमेंट्स भी हैं। एजुकेशन के सर्टिफिकेट भी मैंने जमा किए। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम नहीं आया।
कांता प्रसाद नाम के एक शख्स ने कहा- मैं जिंदा हूं फिर भी मेरा नाम वोटर लिस्ट से काट दिया। मुझे मरा हुआ घोषित कर दिया गया। मैं जन सुनवाई में गया। BLO मेरे घर भी आया। फॉर्म 6 भरवाया। कहा वोटर कार्ड घर पर बनकर आ जाएगा। लेकिन अब तक कोई अपडेट नहीं है।
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