बिहार वोटर लिस्ट संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट की नसीहत: पॉलिटिकल पार्टियों से कहा- 15 ऐसे नाम बताएं जिन्हें जिंदा रहते मृत घोषित किया गया हो; हम जरूर दखल देंगे
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बिहार वोटर लिस्ट में संसोधन को लेकर जुलाई को राहुल गांधी की अगुवाई में विरोध करते विपक्षी पार्टियों के नेता।(फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 जुलाई) को वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा- मौजूदा समय में सभी पॉलिटिकल पार्टियों को NGO की भूमिका निभानी चाहिए। सभी विपक्षी पार्टियां वोटर लिस्ट से वास्तिवक वोटर्स का नाम हटाने का सबूत दें। इससे याचिकाकर्ता के शिकायत को मजबूती मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि- अगर वोटर लिस्ट जेन्युइन वोटरों का नाम हटाया गया तो कोर्ट इस मामले में जरूर दखल देगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
15 ऐसे नाम करें पेश जिन्हें मृत घोषित किया
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के दावे पर कहा- हम एक ज्युडिशियल अथॉरिटी के तौर पर वोटर लिस्ट में संसोधन की प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं। अगर बड़े पैमाने पर मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है तो हम जरूर कदम उठाएंगे। 15 ऐसे वोटर्स के नाम पेश करें, जिन्हें वोटर लिस्ट में मृत घोषित कर दिया गया हो। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट जरुर दखल देगा।
हटाए गए नामों की जानकारी देगा चुनाव आयोग
इससे पहले चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया- मर चुके या राज्य से बाहर जा चुके 65 लाख मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से बाहर किया गया है। इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्ब्ल ने- चुनाव आयोग 1 अगस्त को पब्लिश होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उन सभी लोगों के नामों का जिक्र करेगा, जिन्हें नई लिस्ट से बाहर किया गया है। कोर्ट ने इस पर कहा- अगर ड्राफ्ट में किसी वोटर का नाम जानबूझकर हटाया गया है तो हमें इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए।
अपील करने के लिए 30 दिन दिए जाएंगे
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं उन्हें 30 दिन अपील करने के लिए दिए जाएंगे। सभी राजनीतिक पार्टियों को वोटरों को उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में मदद करना चाहिए। इन पार्टियों को किसी स्वयंसेवी संस्था (NGO) की तरह काम करना चाहिए। इसके लिए काम करना चाहिए कि वास्तविक वोटरों का नाम मतदाता सूची में शामिल होने से नहीं छूटे।
कोर्ट ने एक दिन पहले EC को फटकार लगाई
इससे पहले यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की थी। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(ADR) नाम के NGO की ओर से दायर की गई याचिका में SIR के लिए वैध दस्तावेजों में बदलाव करने की मांग की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस पीटिशन पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से पूछा कि आधार कार्ड, वोटर आइडी कार्ड और राशन कार्ड को मतदाता पहचान पत्र की लिस्ट में क्यों नहीं शामिल किया गया है।

