कर्नाटक CM सिद्धारमैया को MUDA घोटाले में क्लीन चिट: कानून मंत्री एचके पाटिल बोले- मुख्यमंत्री या उनके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया
Published:
2 min read

जस्टिस पीएन देसाई की वन-मैन कमिशन ने MUDA घोटाले में रिपोर्ट कैबिनेट को सौंप दी है। रिपोर्ट में कर्नाटक CM सिद्धारमैया पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क। कर्नाटक के CM सिद्धारमैया और उनके परिवार को MUDA साइट आवंटन केस में क्लीन चिट मिल गई है। जस्टिस पीएन देसाई की वन-मैन कमिशन रिपोर्ट ने कहा- घोटाले के आरोप बेबुनियाद हैं। गुरुवार को कैबिनेट ने यह रिपोर्ट मान ली। इसमें दोषी अफसरों पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। आयोग ने कहा– वैकल्पिक साइट्स देना अवैध नहीं है, ये नियम के मुताबिक ही हुआ।
दाे वॉल्यूम में रिपोर्ट आई
कानून मंत्री एचके पाटिल ने मीडिया से कहा– रिपोर्ट दो वॉल्यूम में आई है और इसमें साफ लिखा है कि सीएम या उनके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया। आयोग ने कुछ अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की है, जिसे कैबिनेट ने मान लिया है। आयोग ने जमीन के डिनोटिफिकेशन और साइट अलॉटमेंट से जुड़े कई पुराने फैसलों की भी जांच की।
क्या है पूरा मामला
यह मामला सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बीएम को मुआवजे के तौर पर 14 प्लॉट मिलने पर उठा था। आरोप था कि ये प्लॉट अपमार्केट विजयनगर लेआउट में हैं, जिनकी कीमत उनकी 3.16 एकड़ जमीन से कहीं ज्यादा है। सवाल यह भी था कि जमीन पर पार्वती का मालिकाना हक नहीं था। लेकिन आयोग ने कहा कि 50:50 स्कीम के तहत जो तरीका अपनाया गया, वही सब पर लागू था। इसमें कोई गड़बड़ी या स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं किया गया था।
पहले भी मिली थी राहत
यह पहला मौका नहीं है जब सिद्धारमैया को राहत मिली है। लोकायुक्त पुलिस ने भी सबूत न मिलने पर पहले ही क्लीन चिट दे दी थी। FIR में सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती, साले बीएम मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराज का नाम था। लेकिन जांच में कुछ नहीं निकला। अब आयोग ने भी साफ कर दिया है कि MUDA का पूरा सिस्टम 2006 से ही गड़बड़ियों से भरा था। ऐसे में गड़बड़ी के लिए अफसर जिम्मेदार हैं, नेता नहीं।

