स्पेस में भारत की वापसी: शुभांशु शुक्ला बने अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय, बोले- यह मेरी नहीं, पूरे भारत की उड़ान
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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज एक्सिओम-4 (Axiom-4) मिशन के तहत अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंच गए।
भारत ने एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रच दिया है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज एक्सिओम-4 (Axiom-4) मिशन के तहत अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंच गए। अंतरिक्ष से भेजे गए पहले संदेश में शुभांशु ने कहा कि यह सिर्फ ISS की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत है। हम 7.5 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। मेरे कंधे पर उभरा हुआ तिरंगा मुझे याद दिलाता है कि मैं आप सबके साथ हूं। मेरे साथ आप भी इस सपने का हिस्सा बनें। आप का सीना भी गर्व से चौड़ा होना चाहिए।
स्पेस में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बने शुभांशु शुक्ला
शुभांशु अब दूसरे भारतीय बन चुके हैं जो पृथ्वी की कक्षा में पहुंचे हैं। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के साथ स्पेस की उड़ान भरी थी।एक्सिओम-4 मिशन को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित NASA के केनेडी स्पेस सेंटर से दोपहर 12:01 बजे IST पर लॉन्च किया गया। लॉन्चिंग के लिए स्पेसएक्स (SpaceX) के फॉल्कन (Falcon 9) रॉकेट और ड्रैगन (Dragon) कैप्सूल का इस्तेमाल किया गया। लॉन्चिंग के कुछ मिनट बाद, ड्रैगन कैप्सूल ने फाल्कन के दूसरे स्टेज से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर लिया। इसी दौरान शुभांशु ने कहा, हम पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। जय हिंद, जय भारत।
Dragon has separated from Falcon 9’s second stage pic.twitter.com/YXIvBoSOn0
— SpaceX (@SpaceX) June 25, 2025
चार देशों का साझा मिशन, भारत के साथ हंगरी और पोलैंड भी
इस मिशन में चार अंतरिक्षयात्री हैं। अमेरिका की कमांडर पैगी व्हिटसन, भारत के पायलट शुभांशु शुक्ला, हंगरी के तिबोर कापू और पोलैंड के स्लावोस उजांस्की। ये सभी करीब 14 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रिसर्च और एक्सपेरिमेंट करेंगे। खास बात यह है कि भारत, हंगरी और पोलैंड तीनों देशों के लिए यह पहला कमर्शियल स्पेस मिशन है।
स्पेस में 1000 से ज्यादा साइंटिफिक रिसर्च होंगे
एक्सिओम-4 (Axiom-4) मिशन पर अंतरिक्ष में कुल 60 साइंटिफिक रिसर्च होंगे। इनमें से कई प्रोजेक्ट्स भारत से जुड़े हैं। भारत ह्यूमन बॉडी, माइक्रोग्रैविटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े एक्सपेरिमेंट करेगा। इस मिशन से भारत को स्पेस टेक्नोलॉजी में नई सीख मिलेगी। इसरो (ISRO) ने कहा है कि यह उड़ान गगनयान मिशन की दिशा में एक ठोस कदम है।
आखिरी मिनट तक सामने आईं तकनीकी अड़चनें
इस लॉन्च से पहले सात बार मिशन टालना पड़ा था। कभी खराब मौसम तो कभी ऑक्सीजन लीक जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आईं। मंगलवार की रात आखिरी मिनट में फॉल्कन-9 (Falcon 9) के लॉन्च एस्केप सिस्टम में हवा की दिशा का डेटा नहीं पहुंच पा रहा था। केवल 35 मिनट पहले सिस्टम अपडेट किया गया। और फिर तय समय पर रॉकेट ने उड़ान भरी।
अब भारत के लिए स्पेस में खुला नया अध्याय
एक्सिओम (Axiom) स्पेस कंपनी का यह चौथा प्राइवेट मिशन है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय को कमर्शियल मिशन के जरिए स्पेस भेजा गया। इससे भारत के कॉमर्शियल स्पेस मार्केट को भी नई दिशा मिलेगी। आने वाले सालों में भारत खुद भी गगनयान के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी में है।

