शिबू सोरेन का निधन: 3 बार खुद अब बेटा CM, केंद्रीय मंत्री रहते हुए हत्या के दोषी करार दिए गए; कैश फॉर वोट में भी फंसे
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पीएम मोदी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन का निधन हो गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सोरेन ने 81 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। सोरेन झारखंड के सीएम के अलावा 8 बार लोकसभा सांसद और 2 बार राज्यसभा सांसद भी रहे।
शिबू सोरेन पिछले 1 महीने से बीमार थे। उनका इलाज दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में चल रहा था। कुछ दिनों से उनकी तबीयत काफी बिगड़ती जा रही थी। सोमवार को उनका निधन हो गया।
आज मैं शून्य हो गया- हेमंत सोरेन
शिबू सोरेन के बेटे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर पिता के निधन की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, उन्होंने कहा, प्रिय दिशोम गुरुजी हमें छोड़कर चले गए। आज मैं शून्य हो गया।
चार दशक का राजनीतिक करियर
संथाल जनजाति से आने वाले शिबू सोरेन को गुरु जी नाम से भी जाना जाता था। चार दशक लंबे राजनीतिक करियर में वे 8 बार लोकसभा सांसद और 2 बार राज्यसभा सांसद चुने गए। बतौर राज्यसभा सांसद उनका दूसरा कार्यकाल अभी जारी था।
- शिबू सोरेन का जन्म रामगढ़ जिले में 11 जनवरी 1944 को हुआ था। तब यह बिहार का हिस्सा था। वे झारखंड के तीन बार सीएम रहे।
- 1970 के दशक में शिबू सोरेन राजनीतिक गतिविधयों में शामिल हुए। उन्होंने आदिवासी भूमि को मुक्त करने के लिए कई आंदोलन और रैलियां की। इसके बाद वह एक आदिवासी लीडर बनकर उभरे।
- उन्होंने 1972 में वामपंथी ट्रेड यूनियन नेता एके रॉय और कुर्मी महतो नेता बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर अलग राज्य की मांग को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया।
- वे पहली बार 1980 में दुमका से लोकसभा के लिए चुने गए, जो बाद में झामुमो का गढ़ बन गया।
- 2000 में बिहार से अलग करके नया राज्य झारखंड बनाया गया।
- 2005 में शिबू सोरेन पहली बार सीएम बने। लेकिन फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित न कर पाने के बाद 9 दिन में इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद शिबू सोरेन दो बार और सीएम बने। लेकिन एक भी बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। वे कुछ महीनों के लिए ही पद पर रहे।
- शिबू सोरेन का सीएम की तरह ही केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी कार्यकाल रहा। वे 2004 में मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री बने। लेकिन 1974 में आदिवासियों और मुस्लिमों के बीच हुई हिंसा के मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी हो गया। इसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। जमानत मिलने के बाद वे फिर केंद्रीय मंत्री बने। लेकिन 2005 में सीएम बनने के बाद उन्होंने केंद्र से इस्तीफा दे दिया।
- सीएम पद पर भी वे सिर्फ 9 दिन रह सके। इसके बाद 2006 में वे फिर से केंद्रीय कोयला मंत्री बने। लेकिन हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। यह पहला मौका था, जब कोई केंद्रीय मंत्री हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए। हालांकि, बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
- 2019 में शिबू सोरेन को अपने गढ़ में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के नलिन सोरेन ने 45,000 वोटों से उन्हें हराया।

