दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना!: बोलीं- मौत की सजा का डर नहीं, कानून का सामना करूंगी; भारत को सच्चा दोस्त बताया
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शेख हसीना बीते दो साल से भारत में ही हैं।
नेशनल डेस्क। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के बारे में सोच रही हैं और वहां पहुंचकर कोर्ट में आरोपों का सामना करने के लिए तैयार हैं। खास बात यह है कि हसीना को एक मामले में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद उनका कहना है कि इस सजा का डर उन्हें अपने देश लौटने से नहीं रोक सकता।
News18 India को दिए एक इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि बांग्लादेश उनका देश है और वह अपने लोगों को मुश्किल दौर में अकेला नहीं छोड़ सकतीं।
‘मैं अदालत का सामना करने को तैयार’
हसीना ने कहा कि वह बांग्लादेश लौटकर कानून का सामना करेंगी और खुद का बचाव करेंगी। हालांकि, उन्होंने मौजूदा ज्यूडिशियल प्रोसेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी मुकदमे का फैसला पहले से तय नहीं होना चाहिए।
उनके मुताबिक, उन्हें निष्पक्ष सुनवाई, वकील की मदद, सबूत पेश करने और गवाहों से जिरह का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार कहती है कि वापस आकर न्याय का सामना करो, तो उनका जवाब है- मैं वापस आने के लिए तैयार हूं।
मौत की सजा से ज्यादा ‘न्याय की चिंता’
एक मामले में मौत की सजा मिलने के सवाल पर हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कई बार जान के खतरे का सामना कर चुकी हैं।
हसीना ने अपने परिवार की हत्या और खुद पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके खिलाफ 19 बार जानलेवा हमले की कोशिश हो चुकी है। उन्होंने 21 अगस्त 2004 के ग्रेनेड हमले को भी याद किया, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
उनका कहना है कि असली चिंता उनकी जान नहीं, बल्कि ज्यूडिशियल सिस्टम के राजनीतिक इस्तेमाल की है। हसीना ने कहा कि अगर मुकदमा राजनीतिक दबाव में चलाया जाता है और आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं मिलता, तो उसे निष्पक्ष न्याय नहीं कहा जा सकता।

‘मेरा लौटना सत्ता के लिए नहीं’
शेख हसीना ने साफ किया कि बांग्लादेश लौटने का उनका मकसद सत्ता में वापस आना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों और आम लोगों के अधिकारों के लिए लौटना चाहती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 के बाद से अवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर केस, गिरफ्तारियां, नौकरी से निकाले जाने, हमले और डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं। उनके मुताबिक, पार्टी के कई लोगों को अपना घर और देश तक छोड़ना पड़ा। हसीना ने कहा- हम बांग्लादेश को और अपने लोगों को अकेले नहीं छोड़ सकते, इसीलिए लौटना जरूरी है।
अवामी लीग पर बैन को लेकर भी बोलीं
बांग्लादेश में अवामी लीग पर लगे बैन को लेकर हसीना ने कहा कि किसी संगठन या पार्टी पर प्रशासनिक रोक लगाई जा सकती है, लेकिन लाखों लोगों की राजनीतिक सोच को खत्म नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पार्टी की जड़ें पूरे बांग्लादेश में हैं और उसका भविष्य लोगों के फैसले से तय होना चाहिए। हसीना ने मौजूदा सरकार से बैन हटाने की मांग करते हुए कहा कि अगर लोग हमारी पार्टी को पसंद नहीं करते तो चुनाव कराकर देखिए और चुनाव में हमें हराकर बताइये।
उनका कहना था- बैन मत लगाइए, लोगों को चुनने दीजिए। अगर आप हमें खत्म करना चाहते हैं तो हमें वोट की ताकत से हराइए। यही लोकतंत्र है।
जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा पर भी सवाल उठाए
हसीना ने जुलाई 2024 में शुरू हुई हिंसा की जांच को लेकर भी अपनी सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि 18 जुलाई 2024 को उन्होंने हर मौत, गोली चलने और हिंसा की घटना की जांच के लिए ज्यूडिशियल इन्क्वायरी कमीशन बनाया। बाद में उन्होंने इस जांच का दायरा बढ़ाया।
हसीना ने आरोप लगाया कि उनके सत्ता से हटने के बाद बनी अंतरिम सरकार ने इस जांच को रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर उनका मकसद सच छिपाना होता तो वह खुद जांच आयोग क्यों बनातीं।

भारत को लेकर बोलीं- ‘वह दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा देश’
भारत से अपने पॉसिबल प्रत्यर्पण और देश वापसी को लेकर हसीना ने कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और प्रत्यर्पण से जुड़े फैसले वहां की लीगल प्रोसेस के तहत होंगे।
उन्होंने कहा कि वह भारत की दोस्ती को महत्व देती हैं, लेकिन बांग्लादेश उनका अपना देश है और वह हमेशा के लिए देश से बाहर नहीं रह सकतीं।
हसीना ने कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी को बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य का फैसला नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र, मानवाधिकार और निष्पक्ष न्याय जैसे मुद्दों पर आवाज जरूर उठाई जा सकती है।
‘जनता तय करे कि देश कौन चलाएगा’
अपने इंटरव्यू के आखिर में हसीना ने कहा कि उनका लौटना सिर्फ उनके व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि बांग्लादेश में राजनीतिक मतभेद चुनाव और संस्थाओं के जरिए सुलझाए जाएंगे या फिर बैन, बदले और दबाव के जरिए।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी नागरिकों का है, जिसमें अवामी लीग के समर्थक भी शामिल हैं। उनका कहना है कि देश का भविष्य किसी बैन से नहीं बल्कि जनता के फैसले से तय होना चाहिए।
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