SCO समिट:: जयशंकर ने किया राजनाथ के फैसले का समर्थन; बताई संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर न करने की वजह
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर फाइल फोटो
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस फैसले का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए जयशंकर ने कहा कि SCO के एक सदस्य देश ने संयुक्त बयान में आतंकवाद का जिक्र नहीं करने की मांग की, जबकि यह संगठन आतंकवाद से लड़ने के लिए बना था।
जयशंकर ने कहा, “जब संगठन का मुख्य उद्देश्य ही आतंकवाद से लड़ना है, और आप उसमें उसका जिक्र नहीं होने दे रहे, तो उन्होंने (राजनाथ सिंह) उस बयान को स्वीकार करने से इंकार कर दिया।”
हालांकि, जयशंकर ने उस देश का नाम नहीं बताया जिसने एससीओ के संयुक्त बयान से आतंकवाद का जिक्र हटवाया, लेकिन उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि संगठन की नींव ही आतंकवाद से लड़ने के लिए रखी गई थी, वही अब इस मुद्दे से बच रहा है।
जयशंकर ने आगे कहा, “एससीओ सर्वसम्मति से चलता है। इसलिए राजनाथ जी ने साफ तौर पर कहा कि अगर बयान में आतंकवाद का जिक्र नहीं होगा, तो हम उस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जो इन दिनों चीन के चिंगदाओ शहर में हैं, उन्होंने गुरुवार को एससीओ समिट के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उसमें आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख नहीं किया गया, खासकर 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले का, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी।
संयुक्त बयान में पहलगाम हमले का जिक्र नहीं किया गया, लेकिन पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 11 मार्च को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण की घटना को शामिल किया गया।
पाकिस्तान की ओर से बलूचिस्तान की घटना को संयुक्त बयान में इसलिए शामिल करवाया गया ताकि भारत पर इसका दोष डाला जा सके।
राजनाथ सिंह ने चीन में एससीओ की बैठक में आतंकवाद के “साजिशकर्ताओं, आयोजकों, और प्रायोजकों” को जिम्मेदार ठहराने की मांग करते हुए पाकिस्तान को खरी खोटी सुनाई थी।
उन्होंने कहा, “कुछ देश सीमा पार आतंकवाद को नीति के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और आतंकियों को शरण देते हैं। ऐसे दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।”
एससीओ की बैठक में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन भी मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” की भी तारीफ की, जो कि पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी शिविरों के खिलाफ चलाया गया था। यह अभियान पहलगाम हमले के जवाब में शुरू किया गया।
उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले का तरीका लश्कर-ए-तैयबा के पिछले हमलों से मेल खाता है। भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति उसके जवाबी कार्रवाई में दिखी।”
एससीओ के बयान में न केवल पहलगाम हमले पर कोई बात नहीं थी, बल्कि भारत के सख्त आतंकवाद विरोधी रुख को भी नजरअंदाज किया गया
भारत के अलावा एससीओ में कजाखस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस सदस्य देश हैं। भारत 2017 में एससीओ का सदस्य बना और 2023 में इसकी अध्यक्षता संभाली।
विदेश मंत्री ने भले ही सीधे तौर पर नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा चीन की तरफ था। क्योंकि इस बार sco समिट की मेजबानी चीन कर रहा है ऐसे में संयुक्त बयान तैयार करना चीन की जिम्मेदारी थी। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के कहने पर ही चीन ने साजिश के तहत संयुक्त बयान में बलूचिस्तान की घटना का जिक्र किया लेकिन पहलगाम हमले पर बात नहीं की।

