2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट-1180: सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक; HC ने सभी 12 आरोपियों को किया था बरी
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2006 में 11 मिनट में 7 ट्रेनों में हुए थे धमाके, इनमें 180 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी
2006 मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट केस में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपियों को दोबारा जेल जाने से राहत दे दी।
दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट के सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। इसके बाद सभी आरोपी जेल से रिहा हो गए थे। 7 ट्रेनों में हुए ब्लास्ट में 180 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। जबकि 800 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। 2015 में महाराष्ट्र की स्पेशल कोर्ट ने इन 12 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें से 5 को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि 7 को उम्रकैद की।
जेल से रिहाई पर रोक नहीं
जस्टिस एमएम सुंद्रेश और एन कोटीश्वर सिंह की बेंच में सुनवाई हुई। महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी की। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को मिसाल नहीं माना जाएगा और इस केस में सभी आरोपियों को नोटिस दिया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने आरोपियों की जेल से रिहाई पर रोक नहीं लगाई है।
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि वह आरोपियों को सरेंडर करने की मांग नहीं कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने फैसले पर रोक की मांग की। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में किए गए कुछ कमेंट MCOCA (The Maharashtra Control of Organised Crime Act) के तहत लंबित केस को प्रभावित कर सकते हैं।
लोकल ट्रेन में हुए थे धमाके
11 जुलाई 2006 में मुंबई में 7 अलग-अलग जगह लोकल ट्रेन ब्लॉस्ट में 180 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह सभी धमाके 11 मिनट के अंदर हुए थे। सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पीड़ित पक्ष साबित करने में विफल रहा और विश्वास करना मुश्किल है कि आरोपियों ने कोई क्राइम किया है। इस फैसले को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

