SC-ST आरक्षण में लागू नहीं हो सकता 'क्रीमी लेयर': केंद्र की सुप्रीम कोर्ट में दलील- सिर्फ आर्थिक स्थिति आरक्षण का आधार नहीं
Published:
3 min read

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
नेशनल डेस्क. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। सरकार का कहना है कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए लागू रही है और इसे SC-ST कैटेगरी तक बढ़ाना मौजूदा आरक्षण नीति के तहत नहीं होगा।
केंद्र ने रिजर्व कैटेगरी में आय के आधार पर अलग सब-कोटा बनाने की मांग वाली याचिका के विरोध में ये जवाब दाखिल किया। सरकार ने कहा कि देश की आरक्षण नीति केवल किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है। इसके पीछे जाति, जनजातीय पहचान, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन और भेदभाव जैसे कई सामाजिक वजह हैं।
आरक्षण नीति में बदलाव के लिए स्टडी जरूरी
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि रिजर्व कैटेगरी में आय के आधार पर अलग सब-कोटा बनाने जैसा कोई भी बदलाव समीक्षा के बाद ही किया जा सकता है। इसके लिए आरक्षण का लाभ पाने वाले समुदायों और लोगों से जुड़े सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों समेत विस्तृत डेटा का अध्ययन करना जरूरी होगा। सरकार ने कोर्ट से ऐसी याचिकाओं में हस्तक्षेप नहीं करने की अपील की, जिनमें आरक्षण नीति को नए सिरे से डिजाइन करने की मांग की जा रही है।
क्या है क्रीमी लेयर
क्रीमी लेयर का सिद्धांत मुख्य रूप से OBC आरक्षण में लागू होता है। इसका मकसद OBC कैटेगरी के संपन्न और सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाता है। मौजूदा व्यवस्था के तहत तय आय सीमा और अन्य मानदंडों के आधार पर क्रीमी लेयर में आने वाले OBC उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। मौजूदा आय सीमा सालाना 8 लाख रुपए है।
SC और ST आरक्षण में फिलहाल इस तरह की क्रीमी लेयर व्यवस्था लागू नहीं है। यानी केवल परिवार की अधिक आय के आधार पर किसी SC-ST व्यक्ति को आरक्षण के लाभ से बाहर नहीं किया जाता।
1971 में पहली बार सामने आया था 'क्रीमी लेयर'
1971 में सत्तानाथन आयोग की रिपोर्ट में क्रीमी लेयर का जिक्र सबसे पहले किया गया था। आयोग ने पिछड़े कैटेगरी के भीतर संपन्न तबके को आरक्षण के लाभ से अलग करने की सिफारिश की थी। बाद में 1992 के इंद्रा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर को बाहर रखने के सिद्धांत को मान्यता दी। इसके बाद केंद्र ने 1993 में OBC क्रीमी लेयर से जुड़े नियम लागू किए।

