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सरकारी स्कूलों पर SC का केंद्र को निर्देश: ग्रामीण-आदिवासी इलाकों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट हों, झारखंड-ओडिशा और बिहार पर विशेष ध्यान दें

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों के दूरदराज इलाकों में स्थित स्कूलों पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा है। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों के दूरदराज इलाकों में स्थित स्कूलों पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा है। (फाइल फोटो)

नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने कहा कि खासतौर पर उन क्षेत्रों के स्कूलों पर ध्यान देने की जरूरत है, जहां गरीब और वंचित तबके के बच्चे पढ़ते हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र से कहा कि झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों के दूरदराज इलाकों में स्थित स्कूलों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोर्ट ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत जरूरी फंड उपलब्ध कराया जाए, ताकि छात्राओं को साफ-सुथरे और स्वच्छ टॉयलेट के साथ जरूरी सैनिटरी सुविधाएं मिल सकें।

4,745 स्कूलों में अलग टॉयलेट नहीं
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में पेश आंकड़ों के मुताबिक, UDISE+ के 2024-25 के सर्वे में देश में कुल करीब 14.7 लाख स्कूल दर्ज किए गए।

ग्रामीण-आदिवासी इलाकों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट हों, झारखंड-ओडिशा और बिहार पर विशेष ध्यान दें



कोर्ट ने मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार माना
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले की सुनवाई करते हुए 30 जनवरी 2026 को मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार माना था। इसके बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की और स्कूलों में छात्राओं के लिए जरूरी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए अलग शौचालय के अलावा कई अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की जरूरत बताई थी। इनमें सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, मासिक धर्म स्वच्छता कॉर्नर और जरूरत पड़ने पर कपड़ों के अलग सेट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

ग्रामीण और आदिवासी स्कूलों पर ज्यादा ध्यान देने को कहा
सुनवाई के दौरान बेंच ने केंद्र से कहा कि सिर्फ आंकड़ों में सुधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन स्कूलों तक सुविधाएं पहुंचाना जरूरी है जहां बुनियादी ढांचा अभी भी कमजोर है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इन इलाकों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं।

बेंच ने खास तौर पर झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों के दूरदराज इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कई स्कूलों में अभी भी पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।

कांग्रेस नेता ने दाखिल की है याचिका
केंद्र की ओर से शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अर्चना पाठक दवे ने कोर्ट के सामने जानकारी रखी।

यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता और इससे जुड़ी जरूरी सुविधाओं के अभाव के कारण कई छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने या कक्षाओं से अनुपस्थित रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम जारी रखने की अनुमति देते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की है।

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