जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन: 6 साल पहले J&K से आज ही हटाई गई थी धारा 370, तब मलिक ही गवर्नर थे
Published:
4 min read

सत्यपाल मलिक 11 मई से RML हॉस्पिटल में एडमिट थे, वे किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे।
जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार (5 अगस्त 2025) को निधन हो गया। वे 79 साल के थे। आज ही के दिन 6 साल पहले जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया गया था, तब सत्यपाल मलिक ही राज्यपाल थे।
मलिक लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही मंगलवार को उनका निधन हो गया। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी उनके निधन की जानकारी दी गई है। पोस्ट में लिखा गया है-पूर्व राज्यपाल सत्यपाल सिंह मलिक जी अब हमारे बीच नहीं रहे।
ब्रेकफास्ट पर प्लानिंग: सिर्फ ‘ढाई’ लोगों को थी जानकारी; जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने की पूरी कहानी
आर्टिकल 370 हटने के वक्त निभाई अहम भूमिका
सत्यपाल मलिक अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे। 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा था। इसमें राज्यपाल रहते मलिक ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्हें गोवा और मेघालय का राज्यपाल भी नियुक्त किया गया था।

सत्यपाल मलिक के निधन पर पीएम मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने लिखा- सत्यपाल मलिक जी के निधन से स्तब्ध हूं। उनके परिवार और समर्थकों के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।
बागपत में जाट परिवार में हुआ था जन्म
सत्यपाल मलिक का जन्म यूपी के बागपत में एक जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से BSC और LLB की पढ़ाई की। मलिक इस दौरान छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने गए थे।
भारतीय लोक दल से राजनीति की शुरुआत, कांग्रेस से राज्यसभा पहुंचे
सत्यपाल मलिक ने 1968-69 में छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1974 में उन्होंने चौधरी चरण सिंह के अगुवाई वाली भारतीय लोक दल पार्टी के टिकट पर बागपत से विधायक बनकर राजनीति में एंट्री की। 1980 में लोक दल से राज्यसभा पहुंचे, फिर कुछ साल बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 1986 में कांग्रेस से राज्यसभा में पहुंचे।
90 के दशक में कांग्रेस से जनता दल में आए
1987 में बोफोर्स घोटाले के बाद सत्पाल मलिक ने कांग्रेस छोड़ दी और वीपी सिंह की जनता दल में चले गए। 1989 में जनता दल से अलीगढ़ लोकसभा सीट से सांसद बने और केंद्रीय संसदीय कार्य और पर्यटन राज्य मंत्री रहे।
सपा से भी लोकसभा चुनाव लड़ा, 2004 में बीजेपी में आए
1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अलीगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2004 में बीजेपी में शामिल हुए और लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन,हार गए। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें बीजेपी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया।
2017 में उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अगस्त 2018 में जम्मू-कश्मीर के गवर्नर बने, उनके ही कार्यकाल में आर्टिकल 370 हटाया गया। इसके बाद वे गोवा (2019-2020) और फिर मेघालय (2020-2022) के राज्यपाल रहे।
विवादों में रहे मलिक
सत्यपाल मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि 2019 के पुलवामा हमले के लिए केंद्र सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि CRPF जवानों को एयरक्राफ्ट नहीं मिले, जिससे इतनी बड़ी घटना हुई। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल रहते हुए उन्होंने कहा कि 'किरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और रिलायंस इंश्योरेंस फाइलें' पास करने के लिए उन्हें 300 करोड़ की रिश्वत की पेशकश हुई थी।
किसान आंदोलन पर सरकार को घेरा तो बीजेपी ने बनाई दूरी
किसान आंदोलन के दौरान भी उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने सरकार के खिलाफ कई बयान दिए थे। वे अक्सर अपनी ही पार्टी (बीजेपी) और सरकार के खिलाफ विवादास्पद बयान देते रहे, जिसकी वजह से बीजेपी भी उनसे दूर हो गई।
उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आया। भ्रष्टाचार के मामलों के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई। वे काफी दिन से हॉस्पिटल में एडमिट थे। वहीं से सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार उन्हें फंसाने की कोशिश कर रही है।

