35 साल बाद खुला कश्मीरी पंडित सरला भट्ट हत्या केस: SIA और पुलिस की 8 ठिकानों पर रेड, 1990 में हॉस्टल से किडनैप कर सड़क पर फेंक दिया गया था शव
Published:
2 min read

सरला भट्ट ने घाटी छोड़ने का फरमान नहीं माना था, इसलिए उनकी हत्या कर दी गई।
जम्मू कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 35 साल पुराने कश्मीरी पंडित सरला भट्ट हत्या केस को फिर से खोल दिया है। मामले से जुड़े सबूत जुटाने के लिए SIA ने सोमवार देर शाम श्रीनगर के 8 ठिकानों पर छापेमारी की।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि सरला भट्ट की हत्या से जुड़े मामले में श्रीनगर के 8 ठिकानों पर छापेमारी की गई। 18 अप्रैल 1990 को सरला को शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के हब्बा खातून हॉस्टल से किडनैप किया गया था। सरला का शव अगले दिन श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में गोलियों से छलनी मिला था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सरला के साथ गैंगरेप का भी दावा किया गया था।
JKLF आतंकियों ने की थी हत्या
जम्मू कश्मीर पुलिस के मुताबिक, भट्ट को जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट से जुड़े आतंकियों ने किडनैप किया था और उनकी हत्या कर दी थी। सरला भट्ट के पास से एक नोट मिला था, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था। इस मामले में निगीन पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। लेकिन तब जांच में पुलिस असली अपराधियों का पता नहीं लगा पाई।
आतंकियों की बात नहीं मानी तो कर दी गई हत्या
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 1990 में आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी और घाटी छोड़ने का फरमान जारी किया था। सुरला भट्ट ने आतंकियों के फरमान को नहीं माना था। जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट ने इसे खुलेआम चुनौती माना और उनकी हत्या कर दी। सरला की हत्या के बाद भी आतंकियों ने उनके परिवार को धमकियां दीं, इतना ही नहीं स्थानीय लोगों को उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने की चेतावनी दी गई।
पिछले साल SIA को सौंपी गई जांच
पिछले साल इस मामले की जांच SIA को सौंपी गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रेड के दौरान तमाम ऐसे सबूत मिले हैं, जो अपराध को सिद्ध करने में मदद करेंगे और भट्ट और उनके परिवार को न्याय दिलाने और पूरी आतंकवादी साजिश का खुलासा करने में मदद करेंगे।

