भारतीय मूल के संकेत पाठक बना रहे जंगी रोबोट: अमेरिकी बॉर्डर पर गश्त करेंगे! यूक्रेन वॉर में भी तैनाती की रिपोर्ट
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तस्वीर में संकेत पाठक अपनी कंपनी के बनाए हुए रोबोट के साथ नजर आ रहे हैं।
नेशनल डेस्क। सोचिए, अमेरिका की सीमा पर गश्त करने वाला कोई सैनिक इंसान नहीं, बल्कि एक ऐसा रोबोट हो जो देखने में बिल्कुल इंसान जैसा लगे। यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म का सीन नहीं है। एक भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी ऐसे ही ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि उनकी कंपनी के रोबोट रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे तक पहुंच भी चुके हैं।
इस कंपनी का नाम Foundation है और इसके संस्थापक भारतीय-अमेरिकी संकेत पाठक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाठक अमेरिका की साउथ बॉर्डर यानी अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर इन रोबोट्स के इस्तेमाल को लेकर अमेरिकी सरकार के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं।
संकेत का मकसद जंग के लिए रोबोट बनाना
संकेत पाठक की कंपनी ऐसे रोबोट विकसित कर रही है जो इंसानों की तरह चल-फिर सकें और मुश्किल जगहों पर काम कर सकें।
पाठक का मकसद सिर्फ फैक्ट्री, गोदाम या दूसरे सामान्य कामों के लिए रोबोट बनाना नहीं है। उन्होंने खुलकर कहा है कि उनकी कंपनी का लक्ष्य युद्ध में इस्तेमाल होने वाले रोबोट बनाना है।
यही वजह है कि Foundation के ह्यूमनॉइड रोबोट को लेकर अमेरिकी रक्षा और सुरक्षा एजेंसियों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर उतरे रोबोट
Foundation के Phantom Mk-I नाम के दो ह्यूमनॉइड रोबोट को इस साल रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इन रोबोट्स से रेकी यानी निगरानी का काम कराया गया।
अगर ये रिपोर्ट सही है, तो यह किसी ह्यूमनॉइड रोबोट के युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल के शुरुआती मामलों में से एक है। हालांकि, तकनीक अभी नई है, इसलिए इनके ऑपरेशन में इंसानों की मदद या निगरानी की जरूरत बनी हुई है।
यानी फिलहाल ये रोबोट पूरी तरह अपने दम पर युद्ध लड़ने वाले सैनिक नहीं हैं, लेकिन युद्ध क्षेत्र में इंसानों की जगह कुछ जोखिम भरे काम करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर इस्तेमाल की तैयारी
संकेत पाठक की नजर अब अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर है। उनका मानना है कि वहां ह्यूमनॉइड रोबोट इंसानी कर्मचारियों की जरूरत कम कर सकते हैं।
उन्होंने Fox News से बातचीत में कहा कि ड्रोन और निगरानी टावर हर जगह नहीं पहुंच सकते। ऐसे में इंसान जैसे रोबोट उन जगहों पर भेजे जा सकते हैं, जहां लगातार निगरानी की जरूरत है।

हालांकि, DHS ने Fox News को बताया कि फिलहाल Foundation के साथ उसका कोई गैर-कॉन्ट्रैक्चुअल समझौता, पायलट प्रोग्राम या एक्टिव प्राइम कॉन्ट्रैक्ट नहीं है।
लेकिन रोबोट के सामने बड़ी मुश्किलें भी हैं
ह्यूमनॉइड रोबोट सुनने में जितने शानदार लगते हैं, असल दुनिया में उनका इस्तेमाल अभी आसान नहीं है।
सबसे बड़ी समस्या बैटरी है। बॉर्डर जैसे बड़े इलाकों में रोबोट को लंबे समय तक चलाने के लिए बार-बार चार्ज करना होगा। इसके अलावा इंसान जैसी चाल और हाथ-पैर की हरकत को मशीन में सही तरीके से करना भी बड़ी तकनीकी चुनौती है।
रोबोट की मोबिलिटी और हाथों की पकड़ भी अभी इंसानों जितनी बेहतर नहीं है। खराब मौसम, ऊबड़-खाबड़ जमीन और लंबे समय तक लगातार काम करने जैसी परिस्थितियां भी इनके लिए चुनौती बन सकती हैं।
यानी अमेरिका की सीमा पर ह्यूमनॉइड रोबोट की तैनाती अभी तुरंत होने वाली चीज नहीं लगती। लेकिन अगर अमेरिकी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह बॉर्डर सिक्योरिटी के साथ-साथ भविष्य की जंग का तरीका भी बदल सकती है।
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