सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा के आरोपी के खिलाफ लगा NSA हटाया: UP सरकार पर 10 लाख का जुर्माना लगाया
Published:
2 min read

सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि दबाव में लिया गया इकबालिया बयान हिरासत का आधार नहीं हो सकता।
नेशनल डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नवंबर 2024 में संभल मस्जिद में हुई हिंसा के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की बेंच ने संभल DM द्वारा अक्टूबर 2025 में जारी किए गए हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा- राज्य के अधिकारियों द्वारा जिक्र किया इकबालिया बयान (कन्फेशनल स्टेटमेंट) किसी नागरिक को हिरासत में रखने की एकमात्र वजह नहीं हो सकता है।
अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया गया- सुप्रीम कोर्ट
बेंच ने कहा- अधिकारियों ने हिरासत में लेने की शक्ति का अवैध तरीके से इस्तेमाल किया। हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने उचित सबूतों पर विचार नहीं किया। ऐसे में 13 अक्टूबर, 2025 को जारी किया गया हिरासत आदेश रद्द किया जाता है और राज्य पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता है।
क्या है मामला
दरअसल, हिंदू पक्ष की याचिका पर कोर्ट ने नवंबर 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) सर्वे का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष का दावा था कि मस्जिद मंदिर तोड़कर उसके ऊपर बनाई गई है। जब ASI की टीम जब संभल मस्जिद में सर्वे करने पहुंची थी तो हिंसा फैल गई थी। इस दौरान 4 लोगों की मौत भी हुई थी। हिंसा के आरोप में मुल्ला अफरोज को भी हिरासत में लिया गया था। अफरोज ने NSA के तहत अपनी हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या कहा
अफरोज की ओर से पेश हुए वकील दिव्येश प्रताप सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता को प्रताड़ित किया गया और फर्जी मुठभेड़ की धमकी देकर पुलिस के सामने जबरन कबूलनामा करवाया गया। पुलिस ने घटना के लगभग 54 दिन बाद अफरोज की गिरफ्तारी दिखाई और उसे सिर्फ पुलिस हिरासत में दिए कथित कबूलनामे के आधार पर फंसाया गया। वकील ने कहा कि पुलिस ने उससे 315 बोर की पिस्टल भी जब्त करने का भी दावा किया है।
अफरोज की हिरासत के दौरान संभल DM ने NSA, 1980 की धारा 3(2) के तहत हिरासत आदेश जारी किया था। इस आदेश को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी और हिरासत आदेश को चुनौती देने वाली अफरोज की याचिकाओं को केंद्र सरकार समेत अन्य अधिकारियों ने खारिज कर दिया था।

