भारत को S-400 की 5 और यूनिट मिलेगी!: दुश्मन के ड्रोन-मिसाइल को 400km दूर ही तबाह कर देता है, ऑपरेशन सिंदूर में भी दम दिखा चुका
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अगर S-400 की 5 नई यूनिट का सौदा होता है, तो भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क और मजबूत होगा और देश की सीमाओं पर लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।
नेशनल डेस्क। भारत को रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 5 और यूनिट मिल सकती हैं। रूस ने भारतीय वायुसेना (IAF) के डिफेंस सिस्टम टेंडर के लिए अप्लाई करते हुए S-400 बेचने की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है।
भारत के पास पहले से ही इस सिस्टम की 4 यूनिट मौजूद हैं, जबकि 5वीं यूनिट की डिलीवरी नवंबर तक होने की उम्मीद है। भारत में S-400 को 'सुदर्शन' नाम दिया गया है। इस सिस्टम ने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी अपना दम दिखाया था। इस दौरान S-400 ने पाकिस्तान की ओर से आने वाले कई प्रोजेक्टाइल को हवा में ही तबाह कर जंग में अहम भूमिका निभाई थी।
400 किमी तक मार कर सकता है S-400
S-400 एक लंबी दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है। इसमें मिसाइलों के साथ-साथ रडार और दूसरे इक्विपमेंट भी शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी करीब 400 किलोमीटर तक की रेंज है।
यानी दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन या दूसरे हवाई खतरों को काफी दूर से ही निशाना बनाया जा सकता है। इसकी वजह से दुश्मन के विमान अपने ही एयरस्पेस में बॉर्डर के नजदीक आने से बचते हैं।
314 किमी दूर पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को मार गिराया था
वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने न्यूज एजेंसी ANI के पॉडकास्ट में बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने करीब 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान एयरफोर्स के एक सर्विलांस एयरक्राफ्ट को मार गिराया था।
उनके मुताबिक यह शायद जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से दर्ज की गई सबसे लंबी दूरी की मार में से एक थी।

भारत ने 2018 में किया था सौदा
भारत ने रूस के साथ 2018 में S-400 की 5 यूनिट खरीदने का समझौता किया था। इनमें से अब तक 4 यूनिट भारत को मिल चुकी हैं। पांचवीं और आखिरी यूनिट की डिलीवरी नवंबर तक होने की उम्मीद है।
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 के प्रदर्शन को देखते हुए भारत ने अब इसकी 5 और यूनिट खरीदने का फैसला किया है। नए सिस्टम की डिलीवरी डील साइन होने के करीब 3 साल बाद शुरू होने की संभावना है।
इन नई यूनिट्स को भारत की पूर्वी और पश्चिमी बॉर्डर पर तैनात किया जा सकता है। इससे देश की एयर डिफेंस को और मजबूत किया जाएगा।
S-500 और Su-57E पर भी नजर
रूस के साथ भारत की रक्षा साझेदारी सिर्फ S-400 तक सीमित नहीं है। रूस की ओर से भारत को कई दूसरे हथियार और डिफेंस सिस्टम भी ऑफर किए जा सकते हैं।
इनमें S-500 Prometheus की को-प्रोडक्शन, Sukhoi-57E स्टील्थ फाइटर जेट, Kilo Class सबमरीन, Kalibr क्रूज मिसाइल, Voronezh स्ट्रैटेजिक अर्ली-वॉर्निंग रडार और Super Sukhoi-30 अपग्रेड प्रोग्राम शामिल हैं।
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