भारत को रूस से मिलेगा सस्ता तेल: यूराल क्रूड ऑयल खरीदने पर 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल डिस्काउंट मिलेगा, ऑफर इसी महीने से शुरू
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शंघाई सहयोग संगठन (sco) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मोदी (फोटो: रॉयटर्स)
इंटरनेशनल डेस्क। भारत के एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से राहत भरी खबर आई है। रूस ने भारत को कच्चे तेल पर छूट देने का ऐलान किया है। रूस यूराल (Ural) क्रूड ऑयल पर 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट देगा। यह ऑफर इसी महीने यानी सितंबर के आखिर से शुरू होगा और अक्टूबर तक लागू रहेगा। अमेरिका के दबाव और बढ़े टैरिफ के बीच यह सौदा भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
बता दें कि अगस्त की शुरुआत में भारत ने थोड़े समय के लिए रूसी तेल खरीद रोकी थी। हालांकि, कुछ ही दिन बाद सौदे फिर शुरू कर दिए। जुलाई में जहां भारत को सिर्फ सिर्फ 1 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिल रही थी, वहीं अगस्त के आखिर में यह 2.50 डॉलर हो गई। अब सितंबर में यह बढ़कर 3 से 4 डॉलर हो गई है।
रुस सिर्फ भारत को दे रहा है खास छूट
रूस ने यह छूट खासतौर पर भारत को दी है। ऑफर उन कार्गो पर लागू होगा, जो सितंबर के आखिर और अक्टूबर में लोड होंगे। रिपोर्ट कहती है कि ट्रम्प प्रशासन ने पिछले हफ्ते ही भारत पर टैरिफ दोगुना कर 50% कर दिया था, ताकि मॉस्को से तेल खरीद पर रोक लगे। मगर इसके उलट रूस और भारत के बीच डील और मजबूत हो रही है। NDTV ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया है।
रुस से तेल खरिदने पर अमेरिका नाराज
अमेरिका लगातार रूस से क्रूड खरीदने के लिए भारत को टारगेट कर रहा है। व्हाइट हाउस के एडवाइजर पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा – यूक्रेन पर पुतिन के हमले से पहले भारत ने रूस से बहुत कम तेल खरीदा। अब भारत रूसी तेल को रिफाइन करके एशिया, अफ्रीका और यूरोप को महंगे दामों पर बेच रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जवाब में कहा- रूस से तेल खरीदने पर कोई अंतरराष्ट्रीय रोक नहीं है। अमेरिका ने भी खुद पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। ऐसे में भारत का रूस से क्रूड ऑयल खरीदना गैर-कानूनी नहीं है।
भारत-रूस-चीन की तिकड़ी और भी मजबूत
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में PM नरेंद्र मोदी और रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात हुई। समिट में PM मोदी ने खुलकर रुस का समर्थन किया। प्रधानमंत्री ने कहा- भारत और रूस का रिश्ता स्पेशल है। इसी मंच पर उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी हुई, जहां दोनों देशों ने आपसी रिश्ते मजबूत करने का भरोसा दिया। इस बयान से अमेरिका और नाराज हो चुका है। साफ है कि तेल सौदे के साथ भारत-रूस-चीन की तिकड़ी और मजबूत हो रही है। यह रणनीतिक संदेश अमेरिका को सीधा जवाब माना जा रहा है।

