अयोध्या मंदिर में कैसे हुआ चोरी का खुलासा: 8 आरोपी, किसका क्या रोल; चोरी का तरीका क्या था- CCTV में धांधली कैसे हुई- सब समझिए
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नेशनल डेस्क.अयोध्या राम मंदिर में ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले SIT की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों के नाम राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, राम शंकर मिश्रा, सुभाष, लवकुश मिश्रा और करुणेश हैं।
इस मामले में तमाम न्यूज चैनल्स और मीडिया हाउसेज ने रिपोर्ट पब्लिश की हैं। इन्हीं के आधार पर यहां जानकारी दी जा रही है।
आरोप क्या हैं
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर BNS की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत ये केस दर्ज किया गया है। इस मामले में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत अन्य आरोप शामिल हैं।
आखिर गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं। कथित तौर पर डोनेशन में गड़बड़ी कैसे हुई? कैसे इस चोरी का खुलासा हुआ। जानिए इस रिपोर्ट में।
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक- 51 साल का टिन्नू यादव अयोध्या का रहने वाला है। वह पहले चाय की दुकान चलाता था। वह विश्व हिंदू परिषद के कारसेवकपुरम से भी जुड़ा हुआ था। यही से टिन्नू यादव की पहचान चंपत राय से हुई। बाद में वह चंपत राय का ड्राइवर बना। आरोप है कि चंपत राय से घनिष्टता के चलते उसे राम मंदिर में कई बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं। राम मंदिर के दान को बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी टिन्नू यादव के पास थी। वह मंदिर के दान की काउंटिंग टीम में था। आरोप है कि टिन्नू यादव के पास राम मंदिर डोनेशन के बॉक्स की चाबी रहती थी।

हालांकि टिन्नू यादव ने कहा- मैं कैश काउंटिंग टीम में शामिल नहीं था। मुझसे जलने वाले लोगों ने ऐसे आरोप लगाए हैं।
राम शंकर मिश्रा उर्फ रवि मिश्रा
रवि मिश्रा डोनेशन काउंटिंग में शामिल था। आरोप है कि उसने दूसरे कर्मचारियों के साथ साजिश रची। बेटे और दामाद को भी कैश काउंटिंग टीम में शामिल किया।
अनुकल्प मिश्रा
अनुकल्प मिश्रा अयोध्या के मिल्कीपुर का रहने वाला है। वह राम शंकर मिश्रा उर्फ रवि मिश्रा का बेटा है। उसे पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा का रिश्तेदार भी बताया गया है। हालांकि राज एक्सप्रेस इसकी पुष्टि नहीं करता। वो राम मंदिर में डोनेशन काउंटिंग टीम में था। SIT की जांच में मिश्रा को मंदिर में गबन का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
आरोप है कि मंदिर में जिम्मेदारी मिलने के बाद सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी बढ़ा है। अनुकल्प की रिश्तेदार नेहा ने NBT से बात करते हुए कहा- अनुकल्प ने नोएडा में महंगा फ्लैट खरीदा है। कई जगह जमीनें ली और रिश्तेदारों को आर्थिक सहायता भी दी।
लवकुश मिश्रा
लवकुश मिश्रा, रमा शंकर मिश्रा का दामाद है। ट्रस्ट में सदस्य रहे अनिल मिश्रा का रिश्तेदार है। आरोप है कि लवकुश ने गबन की गई रकम को ठिकाने लगाने में मदद की। जांचकर्ताओं ने उसके घर से कैश बरामद किया है।
अविनाश शुक्ला
अविनाश शुक्ला मंदिर में सहायक के तौर पर काम कर रहा था। उस पर डोनेशन के पैसों के हेरफेर का आरोप है। जांचकर्ताओं का दावा है कि उसके बैंक अकाउंट से 5 लाख रुपए बरामद हुए हैं।
मनीष कुमार यादव
मनीष यादव टिन्नू यादव का भतीजा है। यह काउंटिंग टीम में शामिल था। आरोप है कि चुराई गई दान की राशि उसके घर से बरामद हुई है।
सुभाष श्रीवास्तव
सुभाष पूर्व बैंक कर्मचारी है। वह कैश काउंटिंग स्टाफ की देखरेख करता था।
करुणेश पांडेय
करुणेश पांडेय पर दान पत्रों से पैसे निकालकर काउंटिंग रूम तक ले जाने की जिम्मेदारी थी। उस पर दान की रसीद में हेरफेर का आरोप है।
दानपत्रों की गिनती कैसे होती थी
मंदिर ट्रस्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को दान में मिले कैश के काउंटिंग की जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद SBI ने गिनती के लिए एक प्राइवेट कंपनी को काम पर रखा। काउंटिंग 14 लोग करते थे। इसमें 11 बैंक कर्मचारी होते हैं। 3 लोग ट्रस्ट के होते हैं। इनके पास 4 डोनेशन बॉक्स की गिनती की जिम्मेदारी होती है।
चोरी का खुलासा कैसे हुआ
न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के आखिर में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को डोनेशन के काउंटिंग से जुड़ी प्रक्रिया में गड़बड़ लगी। पदाधिकारियों को हर दिन बैंक में जमा हो रही राशि और डोनेशन बॉक्स से निकल रही राशि में अंतर दिखा। इसके बाद मामला यहां तक पहुंचा।

गड्डियों में एक्स्ट्रा पैसे छुपाते थे आरोपी
इसके साथ ही काउंटिंग कर्मचारियों ने एक और तरकीब से दान के पैसों का गबन किया। कर्मचारी काउंटिंग के दौरान नोटों की गड्डियों में एक्स्ट्रा नोट छिपा देते थे। जब बैंक के पास नोट गिनने की बारी आती, तब सिर्फ नोटों की गड्डियों ही गिनी जाती थीं। उनका वाउचर गिना जाता था। जब मंदिर से नोटो को बैंक ले जाया जाता था, तब उन एक्स्ट्रा नोटों को बीच में ही निकाल लिया जाता था। आरोप है कि अनुकल्प मिश्रा वाउचर बनाने का काम करता था।
राम मंदिर ट्रस्ट कैम्प ऑफिस प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने न्यूज एजेंसी से कहा- काउंटर पर दिए जाने वाला दान केवल रसीद देने के बाद ही स्वीकार किए जाते हैं। उन्होंने कहा- अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो यह डोनेशन के काउंटिंग बॉक्स से जुड़ी हो सकती है।
2024-2025 में 327 करोड़ की इनकम
जनवरी 2024 में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद भारी दान मिला था। ट्रस्ट की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 2024-25 फायनेंशियल ईयर में 327 करोड़ की आय हुई थी। इसमें 153 करोड़ दान में मिले हैं। जबकि दान के ब्याज से 173 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। मंदिर में हर दिन लगभग 70 से 80 हजार लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं। छुट्टी, त्योहार और वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है।


