राजनाथ सिंह ने बताए मिलिट्री अपग्रेड के प्लान: फाइटर जेट इंजन अब भारत में ही बनेंगे, 10 साल के अंदर ‘सुदर्शन चक्र’ भी एक्टिवेट होगा
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को नोएडा की एक प्राइवेट एयरो इंजन टेस्ट फैसिलिटी के उद्घाटन में आए थे। (फोटो सोर्स: PTI)
नेशनल डेस्क। फाइटर जेट के इंजन जल्द ही भारत में बनने लगेंगे। 10 साल के अंदर एयर डिफेंस सिस्टम 'सुदर्शन चक्र' भी एक्टिवेट हो जाएगा। यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नोएडा में एक प्राइवेट एयरो इंजन टेस्ट फैसिलिटी के उद्घाटन के दौरान कही। उन्होंने इसके साथ ही मिलिट्री अपग्रेड के लिए ड्रोन तकनीक पर भी काम करने की योजनाओं की जानकारी दी।
राजनाथ सिंह ने कहा, ‘जिस तरह का दौर चल रहा है, उस हिसाब से भारतीय सेनाएं देश की रक्षा के लिए दूसरे देशों की सप्लाई पर निर्भर नहीं रह सकती। भारत जल्द ही एक शक्तिशाली स्वदेशी एयरो-इंजन डेवलप करेगा। इस परियोजना की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही क्रियान्वयन भी शुरू हो जाएगा।’
राजनाथ सिंह का यह ऐलान इसलिए खास है क्योंकि वर्तमान में भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में जेट इंजन अमेरिका की एक फर्म से सप्लाई होता है। इंजन सप्लाई में देरी के कारण तेजस विमानों के मैन्यूफैक्चरिंग का काम भी धीमा हो गया है।
'10 साल में सुदर्शन चक्र सभी बड़े संस्थानों को कवर करेगा'
राजनाथ सिंह ने ‘सुदर्शन चक्र’ एयर डिफेंस सिस्टम को भारत की सुरक्षा के लिए गेम चेंजर बताया। उन्होंने कहा, सुदर्शन चक्र के तहत अगले दस सालों में देश के सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को पूर्ण हवाई सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए इस सिस्टम में आक्रामक और रक्षात्मक दोनों एलिमेंट शामिल होंगे।
'भविष्य के युद्ध के लिए ड्रोन बेहद अहम तकनीक'
रक्षामंत्री ने ड्रोन को भी भारत की युद्ध नीति का अहम हिस्सा बताया और इस पर फोकस करने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर, जब हम 'विमान' शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में तेजस, राफेल और लड़ाकू विमानों की तस्वीरें आती हैं। यह स्वाभाविक है क्योंकि ये सभी लड़ाकू विमान हैं। लेकिन आज के बदलते वक्त में युद्ध क्षेत्र में ड्रोन एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभरे हैं।’
रक्षा मंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन इसमें निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्ष इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘जिन देशों ने ड्रोन तकनीक में निवेश किया था, वे युद्ध क्षेत्र में काफी बढ़त हासिल करने में सफल रहे हैं, जबकि अन्य देश पीछे छूट गए।’ उन्होंने कहा, ‘भारत में पहले ड्रोन आयात करने पड़ते थे, अब घरेलू स्तर पर उनका डिजाइन, विकास और निर्माण शुरू कर चुका है।’

