11 साल की बच्ची से रेप, 37 साल बाद फैसला: बाल सुधार गृह भेजा जाएगा 53 साल का दोषी; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अपराध के वक्त उम्र 16 साल थी
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सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
11 साल की बच्ची से रेप के 37 साल पुराने मामले में दोषी शख्स को नाबालिग ठहराया। अब इस आरोपी की उम्र 53 साल है। लेकिन उस पर नाबालिग की तरह केस चलेगा, क्योंकि कोर्ट ने माना है कि अपराध के समय उसकी उम्र 16 साल थी। सुप्रीम कोर्ट ने शख्स की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, लेकिन जेल की सजा रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि 17 नवंबर, 1988 को अपराध के वक्त आरोपी की उम्र 16 साल दो महीने और तीन दिन थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा, नाबालिग होने की अपील किसी भी कोर्ट के सामने की जा सकती है और मामले के निपटारे के बाद भी किसी भी स्तर पर इसे मान्यता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, आरोपी अपराध के समय नाबालिग था। ऐसे में उस पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 के प्रावधान लागू होंगे।
निचली अदालत ने सुनाई थी 5 साल की सजा
एडिशनल सेशन जज ने 1993 में सेक्शन 376 के तहत शख्स को रेप का दोषी ठहराया था और 5 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। निचली अदालत की सजा को हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। आरोपी ने राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले को जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। आरोपी ने नाबालिग होने का मुद्दा सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में उठाया। कोर्ट ने जांच के आदेश दिए, इसमें पाया गया कि अपराध के समय उसकी उम्र 16 वर्ष थी। शीर्ष अदालत ने कहा, ट्रायल कोर्ट ने सजा दी और हाईकोर्ट ने उसे बरकरार रखी। लेकिन इसे जारी नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपी को 15 सितंबर को जुवेनाइल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए कहा है।

