राहुल विरोध क्यों कर रहे: UPI रेवेन्यू मॉडल पर सरकार का दावा- चिदंबरम समेत 5 कांग्रेस सांसदों ने दिया था समर्थन
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राहुल गांधी और पी चिदंबरम
नेशनल डेस्क. UPI में मर्जेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर सियासी घमासान तेज हो गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे UPI टैक्स बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। अब केंद्र सरकार ने संसदीय समिति की सिफारिश का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है। केंद्र का दावा है कि सिफारिश करने वाली कमेटी में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम समेत कांग्रेस के 5 सांसद शामिल थे।
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस ने UPI में MDR शुरू करने की सिफारिश की है और इसे बिना देरी किए लागू करने की अपील की थी।ऑ
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सिफारिश के वक्त ये 5 कांग्रेस सांसद मौजूद थे
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अगस्त को कमेटी ने जब अपनी रिपोर्ट को स्वीकार किया था, तब कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ मौजूद थे। अधिकारी के मुताबिक, मीटिंग मिनट्स में भी इन सांसदों की ओर से किसी तरह का विरोध दर्ज नहीं कराया गया।
'राहुल गांधी क्यों विरोध कर रहे'
सरकार की ओर से सवाल किया गया है कि जब कांग्रेस के सांसदों ने इसका सपोर्ट किया था तो राहुल गांधी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं। अधिकारी ने पूछा- राहुल गांधी उस बात का विरोध क्यों कर रहे हैं जिसका उनके अपने सांसदों, जिनमें पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और UPA सरकार में मंत्री रहे मनीष तिवारी ने संसदीय समिति में समर्थन किया था।
दरअसल, राहुल गांधी ने मोदी सरकार के UPI को लेकर उस फैसले की आलोचना की थी, जिसमें 2000 रुपए से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लगाने का ऐलान किया गया है। इसके बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने झुक गए हैं और MDR के जरिए वे अमेरिका में भारी मात्रा में पैसा पहुंचाना चाहते हैं।
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UPI पर फीस कौन देगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई UPI व्यवस्था से पर्सन टू पर्सन (P2P) लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। किसी भी राशि के ट्रांसफर पर P2P लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा। इसी तरह, ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट (P2M) और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा- इसका मतलब है कि लगभग 96% P2M लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। MDR केवल ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। इसके बजाय यह शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े बैंकों और पेमेंट एप्लिकेशन के बीच डिवाइड किया जाता है। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।

