राहुल गांधी ने सीतामढ़ी में पूजा की: तेजस्वी के साथ जानकी मंदिर पहुंचे; आज वोटर अधिकार यात्रा का 12वां दिन
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राहुल गांधी सफेद टी-शर्ट और कैप में मंदिर पहुंचे। पुजारियों ने उन्हें तिलक लगाया। क्रेडिट- ANI
नेशनल डेस्क: राहुल गांधी ने गुरुवार को बिहार के सीतामढ़ी स्थित जानकी मंदिर में पूजा की। उनके साथ तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। राहुल गांधी इस वक्त बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। आज इसका 12वां दिन है। उनकी यह यात्रा सीतामढ़ी पहुंच चुकी है। कल तमिलनाडु CM एमके स्टालिन भी राहुल की यात्रा में शामिल हुए थे।
सुबह की आरती में भाग लिया
राहुल गांधी और बिहार में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव सीतामढ़ी के पुनौराधाम स्थित माता जानकी के मंदिर पहुंचे। राहुल ने यहां सुबह की आरती में भाग लिया। पुजारियों ने उन्हें तिलक लगाया। इस दौरान कांग्रेस और RJD के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा 17 अगस्त को शुरू हुई थी। 16 दिनों की यह यात्रा बिहार की राजधानी पटना में 1 सितंबर को जाकर खत्म होगी। यात्रा की शुरुआत में बताया गया था कि राहुल 20 से ज्यादा जिलों में जाएंगे।
दरअसल, राहुल गांधी इस यात्रा के जरिए बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए इलेक्शन कमीशन को आड़े हाथ लिया है।
वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर विवाद क्यों
दरअसल, 24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का ऐलान किया था। चुनाव आयोग का कहना है कि लगातार पलायन, युवा वोटरों को शामिल करने, मौतों की सूचना न देने, अवैध विदेशी प्रवासियों के शामिल होने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए वोटर लिस्ट रिवीजन जरूरी है। इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गलतियों को सुधारा जा सकेगा।
अब विवाद यह है कि विपक्ष को लगता है कि इस प्रक्रिया से लाखों लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि नए नियमों के तहत हर मतदाता को EC के 11 मेंशन किए गए डॉक्यूमेंट्स में कोई एक जमा करना जरूरी है, जबकि बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास जरूरी कागजात नहीं हैं। इससे दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष को लगता है कि ये फैसला बिहार चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में लिया गया है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले से सिर्फ बीजेपी और NDA को फायदा होगा। चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि प्रक्रिया पारदर्शी है। सभी को दस्तावेज जमा करने के पर्याप्त मौके मिलेंगे। हालांकि, विपक्ष संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी है।
अब मामला कोर्ट में चल रहा है। संसद के मानसून सत्र में इसे लेकर खूब विवाद हुआ था। विपक्ष ने विरोध में एक मार्च भी निकाला था।

