राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग: CJI बोले- जल्दी है तो अर्ली हियरिंग लगाइए, हमारे लिए सभी बराबर
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राहुल गांधी ने तीन साल पहले भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर एक स्टेटमेंट दिया था। इसी को लेकर उन पर मानहानि का मामला चल रहा है।
नेशनल डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार (9 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता से कहा कि अगर वह मामले की जल्द सुनवाई चाहते हैं तो इसके लिए अर्ली हियरिंग की अर्जी दाखिल करें। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले को तय प्रोसेस के तहत ही सुना जाएगा।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। शिकायतकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं, लेकिन ट्रायल कोर्ट के समन लेने के खिलाफ उनकी अपील करीब 5 महीने से लिस्ट नहीं हुई है। ऐसे में उन पर एक्शन भी नहीं लिया जा सका है।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा- यहां प्रोसीजर फॉलो होती है। हमारे सामने सभी बराबर हैं। अर्ली हियरिंग की अर्जी लगाइए, हम इसे सुनेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी के 2022 के एक बयान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने दिसंबर 2022 में अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर दावा किया था कि चीनी सैनिक भारतीय जवानों को पीट रहे हैं।
इस बयान को लेकर लखनऊ की एक कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव थे, जो बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) के पूर्व डायरेक्टर रह चुके हैं। उनका पद आर्मी कर्नल के बराबर था।

श्रीवास्तव का आरोप है कि राहुल गांधी ने 9 दिसंबर 2022 को भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर 16 दिसंबर को जो बयान दिया, वह भारतीय सेना के खिलाफ अपमानजनक था। इस बयान से भारतीय सेना की छवि को नुकसान पहुंचा और यह सेना के खिलाफ मानहानि वाली टिप्पणी थी।
हाईकोर्ट के फैसले को राहुल गांधी ने SC में चुनौती दी
इस मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस फैसले को चुनौती दी थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के समन को बरकरार रखा।
इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट पहले ही उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक लगा चुका है। कोर्ट ने उनसे पूछा था कि जिस आधार पर उन्होंने चीनी सैनिकों के भारतीय जवानों को पीटने की बात कही थी, उसका सोर्स क्या था। इसके बाद इस मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई।
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