रथ यात्रा: पुरी में रथ पर बैठे भगवान जगन्नाथ, लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचे, अहमदाबाद में बेकाबू हुआ हाथी
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पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पास बड़ी संख्या में भक्त रथ यात्रा देखने के लिए उमड़े हैं। (फोटो- ANI)
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की शुरुआत हो गई है। यहां विश्व की सबसे बड़ी रथ यात्रा होती है। सुबह 6 बजे भगवान जगन्नाथ का मंगला आरती हुई। सुबह साढ़े 9 बजे से भगवान को मंदिर से बाहर लाने की विधिया और पूजन शुरु हुआ। रथों की पूजा करने के बाद बलभद्र, भगवान जगन्नाथ और बहन सुभद्रा को रथ पर बिठाया गया। पुरी राजपरिवार के गजपति दिव्य सिंह देव सोने के झाड़ू से बुहारा लगाकर रथ यात्रा की शुरुआत करेंगे। रथयात्रा 3 किमी दूर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। यह मंदिर भगवान की मौसी का घर माना जाता है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पास बड़ी संख्या में भक्त रथ यात्रा देखने के लिए उमड़े हैं।
जगन्नाथ यात्रा को रथ उत्सव और श्री गुंडिचा यात्रा भी कहा जाता है। यह ओडिशा में हर साल मनाया जाने वाला त्योहार है। रथ यात्रा शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को चंद्र मास में निकाली जाती है। यह समय चंद्रमा की बढ़ती चमक के कारण बेहद शुभ माना जाता है।
यात्रा दुनिया की सबसे प्राचीन रथ यात्रा
जगन्नाथ संस्कृति के प्रसिद्ध विद्वान सुर्यनारायण रथ शर्मा ने बताया कि रथ यात्रा दुनिया की सबसे प्राचीन रथ यात्रा है। ऐसा माना जाता है कि यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लाखों की संख्या में भक्त रथ यात्रा देखने के लिए उमड़े हैं। भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा 12 वीं सदी के गुंडिचा मंदिर में 9 दिन के निकल रहे हैं।
भगवान स्वयं भक्त के द्वार जाते हैं
जगन्नाथ रथ यात्रा पर पुरी से बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा, "आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू होने जा रही है। भगवान रथ पर बैठकर अपनी मौसी गुडिंचा के मंदिर जाएंगे, वह 3 किमी की यह यात्रा रथ पर तय करेंगे। ओडिशा और सनातन की कितनी सुंदर परंपरा है कि भगवान स्वयं भक्त के द्वार पर जाते हैं। अनंत कोटि वर्षों से यह मान्यता है कि महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु विष्णु शयन करते हैं निवास करते हैं। जब स्नान पूर्णिमा होती है स्नान के बाद भगवान बीमार पड़ते हैं। उनका इलाज किया जाता है। फिर उनका नवयौवन दर्शन किया जाता है। इसके बाद वह गुंडिचा मंदिर अपनी मौसी के घर रथ से जाते हैं''।
गुंडिचा भगवान जगन्नाथ का जन्म स्थान
भक्त भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा के रथ को नंदीघोष, तालध्वजा और दरपदलन और फिर गुंडिचा मंदिर तक 3 किमी खीचेंगे। कुछ किदवंतियों के अनुसार यह चार देवताओं भगवान जगन्नाथ, बालभद्र, सुभद्र और सुदर्शन का जन्म स्थान है।

पश्चिम बंगाल में पहली बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जा रही है। दीघा जगन्नाथ मंदिर से सीएम ममता बनर्जी ने रथ यात्रा की शुरुआत की। जिसका रुट 1 किमी है। (फोटो- ANI)
अहमदाबाद में रथ यात्रा में हाथी बेकाबू हुआ
अहमदाबाद में रथ यात्रा के दौरान जुलूस में एक हाथी उग्र हो गया। हालांकि हाथी को तुरंत काबू में कर लिया गया। हाथी को यात्रा से दूर कर दिया गया। अग्निशमन विभाग, डॉक्टर और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं।

