पुडुचेरी का स्थापना दिवस: भारत का ऐसा राज्य जहां अभी भी फ्रेंच सिविल लॉ लागू; यूनिक कल्चर के चलते 3 अलग-अलग जगह बसा
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280 साल तक फ्रांसीसियों ने किया राज, अब 3 अलग राज्यों में है 4 जिले। file
आज 1 जुलाई को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी का स्थापना दिवस है। इसी दिन पुडुचेरी में संघ राज्य क्षेत्र अधिनियम 1963 लागू हुआ था। जिसके तहत पुडुचेरी को विधानसभा का दर्जा मिला था। पुडुचेरी पर 280 साल तक फ्रांसीसियों का शासन था।
पुडुचेरी और कराइकल जिले तमिलनाडु राज्य से घिरे हैं। यनम जिला आंध्रप्रदेश और माहे जिला केरल से घिरा हुआ है। अब देखा जाए तो ये चारों जिले भौगोलिक रूप से अलग-अलग राज्यों में थे, लेकिन उन्हें एक साथ मिलाकर ‘पुडुचेरी’ नाम का केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इन सभी क्षेत्रों की संस्कृति, भाषा और प्रशासनिक विरासत में फ्रांसीसी प्रभाव था, इसलिए भारत सरकार ने उन्हें एक ही प्रशासनिक इकाई के रूप में बनाए रखा।
तो जानते हैं पुडुचेरी के इतिहास के बारे में..
पुडुचेरी का इतिहास
पुडुचेरी का इतिहास 300 ईसा पूर्व से पहले का है। ये क्षेत्र तमिल संगम सभ्यता का हिस्सा था। पुडुचेरी को पहले विदेह देश, अरैचेरि और पुडुपट्टिनम के नाम से जाना जाता था। अरिकेमेडु में हुए उत्खनन में पहली शताब्दी में रोमन लोगों के पहुंचने के प्रमाण मिले हैं। चौथी शताब्दी में यहां पल्लव साम्राज्य का शासन था। बाद में चोलों ने यहां राज किया था। उत्तर भारत के कुछ मुस्लिम शासकों ने भी यहां शासन किया था। पुडुचेरी शब्द का तमिल में मतलब न्यू टाउन होता है।
फ्रेंच पुडुचेरी कैसे आए
रोमिला थापर की किताब ए हिस्ट्री ऑफ इंडिया के मुताबिक, 1665 में डच और पुर्तगाली के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए फ्रांसीसी भी भारत व्यापार करने के लिए आए। फ्रांसीसी अधिकारी फ्रैंक कैरो ने भारत के कई हिस्सों का दौरा किया।
1673 में बीजापुर के सुल्तान के सूबेदार शेर खान ने व्यापार करने के लिए फ्रांसीसियों को पुडुचेरी दे दिया। पहले यह एक फिशिंग गांव के रूप में था। फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी फ्रांस्वा मार्टिन ने इस शहर को डेवलप किया था। फ्रांस्वा मार्टिन पुडुचेरी के पहले गवर्नर भी थे। 1816 से पुडुचेरी फ्रांस के पास ही रहा।
इसी तरह फ्रांसीसियों ने तटीय इलाके के यनम, माहे, और कराईकल पर भी कब्जा कर लिया। फ्रांसीसियों ने पुडुचेरी में नौसेना का अड्डा बनाया। जहां से फ्रांसीसियों ने चीन, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया तक व्यापार किया जाता था। साथ ही कपास, मसाले और रेशम जैसी चीजें यूरोप और एशियाई देशों में भेजे जाते थे। यहां के कपड़ा उद्योग का फ्रांस की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान था। लेकिन यहां के कपड़ा मील में काम करने वाले मजदूरों की हालत बेहद खराब थी। अनपढ़ मजदूरों से फ्रांसीसी अधिकारी 11 घंटे काम करवाते थे। उन्हें बहुत कम वेतन दिया जाता था।
"Unsettling Utopia: India and Colonialism दस्तावेज के मुताबिक, 1928 तक पुडुचेरी में मजदूरों के हक की बात होने लगी थी। कई आंदोलनों को फ्रांसीसी पुलिस ने कुचल दिया था। उस समय वरदराजुलु सुब्बैया नाम के एक 17 साल के लड़के ने पुडुचेरी में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया। यह आंदोलन 3 महीने चला और सुब्बैया को स्कूल से निकाल दिया गया। सुब्बैया नेहरु, गांधी और रुसी क्रांति से प्रेरित था। दसवीं पास करने के बाद सुब्बैया मद्रास (अब चैन्नई) में एक नौकरी करने लगे। जहां उनकी मुलाकात बड़े कम्युनिस्ट नेता आमिर हैदर खान से हुई। उन्हें अंग्रेज कई दिनों से ढूंढ रहे थे। उनके साथ मिलकर सुब्बैया ने आंदोलन की रणनीति सीखी।
1933 में वो वापस पुडुचेरी आ गए। उन्होंनें मजदूरों की हालत देखी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए महात्मा गांधी की हरिजन सेवक संघ की एक शाखा पुडुचेरी में खोली। इसमें उन्होंने मजदूरों को जोड़ा। साथ ही सुदंतीरम नाम की एक पत्रिका भी निकाली। जिसमें उन्होंने मजदूरों के हक के लिए आवाज उठाई।
14 फरवरी 1935 में वी सुब्बैया ने पुडुचेरी की सवाना मिल में मजदूरी की हड़ताल घोषित कर दी। उन्होंने मजदूरों के काम के 10 घंटे करने, वेतन 3 आने से बढ़ाकर 6 आना करने, गर्भवती महिलाओं को आधे महीने का वेतन और छुट्टी देने की मांगे रखी थी। मजदूरों का ये आंदोलन 84 दिन चला। उनकी मांगे मान ली गईं। इसका पूरा क्रेडिट वी सुब्बैया को मिला। वो मजदूरों के बीच मसीहा बनकर उभरे।
अब वी सुब्बैया ने मजदूरों का ट्रेड यूनियन बनाने की मांग रखी। लेकिन फ्रांसीसी सरकार ने इसे नहीं माना। जुलाई 1936 में वी सुब्बैया ने एक बार फिर बड़ा आंदोलन कर दिया। इस बार यह आंदोलन तीन मिल (सवाना, रोडिए और एली) के मजदूर कर रहे थे। तभी फ्रांसीसी पुलिस ने उनपर गोलियां चलवा दीं। 12 मजदूर इस गोलीबारी में मारे गए। गुस्से में मजदूरों ने सवाना मिल में आग लगा दी। वी सुब्बैया किसी तरह बचे। ये घटना दुनियाभर के अखबरों की सुर्खियां बनी। इस मुद्दे को फ्रेंच की कम्युनिस्ट सरकार ने वहां की संसद में उठाया। फ्रांसीसी सरकार के बुलावे पर वी सुब्बैया पेरिस गए और मजदूरों की कई मांगे मनवाईं। भारत ही नहीं पूरे एशिया में पुडुचेरी ऐसी जगह बनी जहां मजदूरों के लिए 8 घंटे काम करने का नियम बना।
वी सुब्बैया ने इसी के साथ पुडुचेरी की आजादी के लड़ाई शुरू कर दी। लेकिन 1940 में फ्रांस में सत्ता परिवर्तन होते ही उन्हें जेल में डाल दिया गया। जहां वो 2 साल तक जेल में ही रहे। जेल से बाहर आकर उन्हें खुद की कम्युनिस्ट पार्टी बनाई। उन्हें अप्रैल 1944 में पुडुचेरी से निष्काषित कर दिया। सितंंबर 1945 में उन्हें पुडुचेरी लाया गया। 15 अगस्त 1947 में भारत के आजाद होते ही पुडुचेरी में भी आंदोलन ने स्पीड पकड़ ली।
फ्रेंच ने कैसे पुडुचेरी को छोड़ा
1947 में अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए। फ्रांस का पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के चंदन नगर पर कब्जा अभी भी था। 7 मई 1950 में फ्रांस ने जनमत संग्रह के आधार पर चंदन नगर को भारत को सौंप दिया लेकिन वो पुडुचेरी छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। 1952 में सुब्बैया ने कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक किया। पुडुचेरी की कम्युनिस्ट पार्टी ने सशस्त्र वॉलंटियर दस्ते भी बनाए। उन्हें पुडुचेरी की सीमा पर ट्रेनिंग भी दी गई। 7 अप्रैल 1952 में पुडुचेरी की कम्युनिस्ट पार्टी ने तिरूबुवानी इलाके पर कब्जा कर लिया। वहां भारतीय झंडा लहराया गया। इस तरह कई इलाके कब्जे में ले लिए गए।
1 नबंवर 1954 में पुडुचेरी का भारत में विलय
9 अगस्त 1954 में वी सुब्बैया ने सभी दलों के साथ मिलकर पूरे पुडुचेरी में हड़ताल शुरु कर दी। उन्होंने फ्रांस से पुडुचेरी छोड़ने को कहा। पीएम नेहरू भी फ्रांस पर दबाव बना रहे थे। आखिरकार 13 अक्टूबर 1954 में फ्रांस के PM पियरे मेंडेस फ्रांसे झुक गए और पुडुचेरी को भारत को सौंपने के लिए तैयार हो गए। 1 नबंवर 1954 को पुडुचेरी, यनम, माहे और कराईकल का भारत में विलय हो गया। मई 1962 में फ्रांसीसी संसद ने दोनों देशों के बीच हुई संधि पर मुहर लगाई। 16 अगस्त 1962 में फ्रांसीसी संसद की मुहर लगे दस्तावेज भारत को सौंप दिए।
यहां अभी भी फ्रेंच सिविल लॉ लागू
पुडुचेरी भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। पुडुचेरी का कुल एरिया 492 वर्ग किलोमीटर है। पुडुचेरी की GDP ₹5.21 लाख करोड़ है। पुडुचेरी में 33 विधानसभा सीट हैं। जिसमें 30 निर्वाचित और 3 सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित होते हैं।
यहां केंद्र सरकार का नियुक्त लेफ्टिनेंट गर्वनर (LG) होता है। यहां एक लोकसभा क्षेत्र और एक राज्यसभा सीट है। स्टेटिक्स टाइम्स के मुताबिक यहां 17 लाख से अधिक जनसंख्या है। पुडुचेरी भारत का एक मात्र राज्य है जहां अभी भी फ्रांसीसी सिविल लॉ लागू होता है।
1956 की समर्पण संधि के तहत, जब पुडुचेरी का भारत में विलय हुआ, तो दोनों देशों के बीच स्पष्ट किया गया कि फ्रांसीसी नागरिक कानूनों को तब तक बनाए रखा जाएगा जब तक कि वहां की जनता कोई बदलाव नहीं चाहती। इसी संधि के कारण पुडुचेरी में आज भी विवाह, संपत्ति, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में फ्रांसीसी सिविल लॉ लागू होता है।

