किसके लिए काम कर रहा है इलेक्शन कमीशन: प्रियंका गांधी बोलीं- बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के नाम पर वोट बंदी, EC बताए उसका मकसद क्या
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कांग्रेस नेता प्रियांका गांधी (फाईल फोटो)
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने गुरुवार को बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। प्रियंका ने कहा, बिहार में वोटबंदी लागू की जा रही है। उन्होंने पूछा, चुनाव आयोग किसके लिए काम कर रहा है और उसका मकसद क्या है?
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- बिहार में Special Intensive Revision के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए जनता पूछ रही है कि क्या बिहार में 'वोटबंदी' लागू की जा रही है? मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया में भयंकर अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। जनता में अफरा-तफरी का माहौल है और चुनाव आयोग सारे सवालों पर मौन है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि चुनाव आयोग किसके लिए काम कर रहा है और उसका मकसद क्या है? याद रहे, पहले भी देश की जनता ने संविधान को कुचलने की हर कोशिश को नाकाम किया है और इस बार भी नाकाम करेगी।
क्या है वोटर लिस्ट रिवीजन
24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का ऐलान किया था। चुनाव आयोग का कहना है कि लगातार पलायन, युवा वोटरों को शामिल करने, मौतों की सूचना न देने, अवैध विदेशी प्रवासियों के शामिल होने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए वोटर लिस्ट रिवीजन जरूरी है। इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गलतियों को सुधारा जा सकेगा।
वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर बवाल क्यों
विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से लाखों लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि नए नियमों के तहत हर मतदाता को दस्तावेज जमा करना जरूरी है, जबकि बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास जरूरी कागजात नहीं हैं। इससे दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष को लगता है कि ये फैसला बिहार चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में लिया गया है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले से सिर्फ बीजेपी और NDA को फायदा होगा। चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि प्रक्रिया पारदर्शी है। सभी को दस्तावेज जमा करने के पर्याप्त मौके मिलेंगे। हालांकि, विपक्ष संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी है। विपक्ष ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था, हालांकि कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने वोटर रिवीजन लिस्ट के दौरान मांगे जाने वाले दस्तावेजों में आधार कार्ड, पहचान पत्र को भी शामिल करने की सलाह दी है।

