आपातकाल के 50 साल: मोदी बोले- इमरजेंसी में कांग्रेस ने डेमोक्रेसी को बंधक बनाया, वो 641 दिन लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले दिन थे
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भारत में कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने 25 जून 1975 में इमरजेंसी लगाई गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को आपातकाल की 50वीं वर्षगाठ पर कांग्रेस पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में जिस तरह से संविधान की भावना का उल्लंघन हुआ था, उसे कोई भी भारतीय नहीं भूल सकता।
कांग्रेस ने किया पलटवार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीजेपी पर पलटवार किया है। उन्होंने X पर लिखा- अघोषित इमरजेंसी@11, मोदी सरकार लोकतंत्र पर 5 गुना हमला कर रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया X पर एक थ्रीट पोस्ट की है। पीएम मोदी ने संवैधानिक सिद्धांतों को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने लिखा- आपातकाल देश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला दिन था। संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया था, मौलिक अधिकार का हनन, प्रेस की स्वतंत्रता खत्म कर दी गई और कई पॉलिटिकल लीडर, सोशल वर्कर्स, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया था।
Today marks fifty years since one of the darkest chapters in India’s democratic history, the imposition of the Emergency. The people of India mark this day as Samvidhan Hatya Diwas. On this day, the values enshrined in the Indian Constitution were set aside, fundamental rights…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 25, 2025
कांग्रेस ने लोकतंत्र को बंधक बनाया- पीएम
पीएम मोदी ने इंदिरा सरकार पर डेमोक्रेसी को अरेस्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा- यह ऐसा लग रहा था उस समय सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया हो। पीएम मोदी ने आपातकाल में संविधान में 42वें संसोधन को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने इसे कांग्रेस की धोखेबाजियों का प्रमुख उदाहरण बताया। आपातकाल में संविधान में कई संसोधन में करके बड़े बदलाव किए गए थे। 1977 और 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने 43वें और 44 वें संविधान संसोधन में उन्हें आंशिक रुप से पलट दिया।
उन्होंने लिखा कि गरीब, हाशिए पर लोग और दलित-वंछितों को टारगेट किया गया। साथ ही उनकी गरिमा का अपमान किया गया।
'अपने अनुभव सोशल मीडिया पर बताएं'
पीएम मोदी ने इमरजेंसी के दौरान उनके अनुभव भी बताएं हैं। उन्होंने लिखा- इमरजेंसी डायरीज में आपातकाल की मेरी यात्रा का वर्णन है। इसने मेरी यादों को ताजा कर दिया। उन्होंने लोगों से इमरजेंसी में पीड़ित परिवारों से सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करने की अपील की है। उन्होंने लिखा कि इससे हमारे देश के युवा 1975 से 1977 के शर्मनाक दिनों से अवेयर हो सकें।
BlueKraft is honoured to present a new book: The Emergency Diaries - Years that Forged a Leader.
— BlueKraft Digital Foundation (@BlueKraft) June 25, 2025
The book delves into the compelling role that @narendramodi, then a young RSS Pracharak, played in the fight against Emergency.
Based on first person anecdotes from associates who… pic.twitter.com/rFeg2v6t7n
641 दिन तक लागू थी इमरजेंसी
भारत में कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने 25 जून 1975 में लगाई गई थी। 21 मार्च 1977 के दिन हटाई गई थी। कुल 21 महीने 26 दिन यानी 641 दिन तक देश में इमजेंसी लागू रही थी। यह भारत के इतिहास का सबसे विवादित हिस्सा है। इसे संविधान के आर्टिकल 352 के आंतरिक अशांति के तहत लागू किया गया था जिसके गंभीर कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक उद्देश्य थे।

