पैकेज्ड फूड पर रेड वार्निंग लेबल पर घमासान: हेल्थ एक्सपर्ट बोले- नियम बहुत ढीले, कंपनियों ने कहा- पूरा मार्केट लाल हो जाएगा, नुकसान भी होगा; क्या है माजरा
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पैकेट में मिलने वाले चिप्स, बिस्किट, नमकीन और दूसरे जंक फूड पर रेड वार्निंग लेबल लगाए जाएंगे, ताकि ग्राहक को पता रहे कि प्रोडक्ट में चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट तय लिमिट से ज्यादा तो नहीं है। (फोटो AI से जनरेट की गई है)
नेशनल डेस्क। पैकेज्ड फूड के पैकेट पर अब लाल निशान लगाने की सरकार की तैयारी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रस्ताव का विरोध दोनों तरफ से हो रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि नियम इतने ढीले हैं कि कई ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले प्रोडक्ट भी चेतावनी से बच जाएंगे। वहीं, फूड कंपनियों का कहना है कि नियम इतने सख्त हैं कि बाजार में रखे लगभग सभी प्रोडक्ट पर लाल निशान लग जाएगा।
दरअसल, Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI ने पैकेज्ड फूड और ड्रिंक के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अगर किसी प्रोडक्ट में एडेड शुगर, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो तय सीमा से ज्यादा पाए जाते हैं, तो पैकेट पर लाल रंग का हेक्सागोन यानी छह कोनों वाला निशान लगाया जाएगा।
एक चीज ज्यादा है तो लाल निशान नहीं?
Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थ एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि अगर किसी प्रोडक्ट में सिर्फ चीनी बहुत ज्यादा है, लेकिन नमक और फैट तय सीमा के अंदर हैं, तो उसे चेतावनी नहीं मिलेगी।
UNC Gillings School of Global Public Health के प्रोफेसर बैरी पॉपकिन ने इसे बेअसर तरीका बताया। उनके मुताबिक दुनिया में जिन देशों ने फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लागू की है, वहां हर चीज के लिए अलग चेतावनी दी जाती है।
यानी एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि चीनी ज्यादा हो तो चीनी का निशान, नमक ज्यादा हो तो नमक का और सैचुरेटेड फैट ज्यादा हो तो उसका अलग निशान लगाया जाए।

सरकार के प्रस्ताव पर सवाल
रॉयटर्स के मुताबिक, हेल्थ ग्रुप 3S And Our Health ने सरकार के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपनी आपत्ति रखने की तैयारी की है। ग्रुप ने अपनी ड्राफ्ट दलील में कहा है कि प्रस्ताव में कई ऐसे रास्ते हैं, जिनकी वजह से ज्यादा चीनी या फैट वाले कुछ प्रोडक्ट भी चेतावनी से बाहर रह सकते हैं।
मसलन, प्रस्ताव में शहद, गुड़ और इसी तरह के कुछ प्राकृतिक रूप से ज्यादा शुगर या फैट वाले फूड प्रोडक्ट को छूट दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 10 सितंबर को सुनवाई होनी है।
27% शुगर वाले प्रोडक्ट भी चेतावनी से बाहर!
रॉयटर्स के मुताबिक, भारत में बिकने वाले Kellogg's Multigrain Chocos में लेबल के अनुसार वजन के हिसाब से करीब 27% एडेड शुगर है। लेकिन इसमें फैट और नमक प्रस्तावित सीमा के अंदर हैं। ऐसे में मौजूदा नियम के हिसाब से इस प्रोडक्ट को चेतावनी लेबल से बाहर रखा जा सकता है।
Kellogg's की मालिक कंपनी Mars ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि वह साफ और विज्ञान पर आधारित न्यूट्रिशन जानकारी का समर्थन करती है और भारत के नियम बदलने पर उनका पालन करेगी। कंपनी ने साथ ही कहा कि अलग-अलग जगहों पर खाने की चीजों और लोगों की पसंद में अंतर होता है और बैलेंस डाइट में हर तरह के खाने की जगह हो सकती है।

अब कंपनियों की भी टेंशन सुनिए
हेल्थ एक्सपर्ट्स जहां नियमों को बहुत ढीला बता रहे हैं, वहीं फूड कंपनियों को इसके उलट डर है कि सरकार ने बहुत सख्त लिमिट तय कर दी है। सबसे बड़ा विवाद यह है कि सरकार किसी प्रोडक्ट को 100 ग्राम के आधार पर जांचना चाहती है, न कि उस प्रोडक्ट की एक सामान्य सर्विंग (एक बार खाने) के हिसाब से।
एक इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि कोई व्यक्ति एक बार में 100 ग्राम अचार या केचप नहीं खाता। कंपनियां चाहती हैं कि चेतावनी तय करने के लिए एक सर्विंग को आधार बनाया जाए।
शुगर सिर्फ 3%, फैट 4.2% से ज्यादा हुआ तो लाल निशान
कंपनियों की दूसरी बड़ी चिंता तय की गई सीमा को लेकर है। प्रस्ताव के मुताबिक फूड प्रोडक्ट में एडेड शुगर के लिए 3% और फैट के लिए 4.2% की लिमिट रखी है। इससे ज्यादा होने पर पैकेट के आगे लाल लेबल लगाना अनिवार्य होगा। नमक के लिए भी इसी तरह की लिमिट है।
एक भारतीय फूड कंपनी के CEO ने तो यह तक कहा कि इन नियमों के हिसाब से तो मार्केट में सब कुछ लाल हो जाएगा।

मिठाई और नमकीन वालों को सबसे ज्यादा डर
भारत में इसका असर सिर्फ बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों पर ही नहीं पड़ेगा। पारंपरिक मिठाई और नमकीन बनाने वाली इंडस्ट्री भी परेशान है।
Federation of Sweets and Namkeen Manufacturers में करीब 5000 मेंबर हैं। संगठन का कहना है कि चीनी, नमक और फैट कई पारंपरिक मिठाइयों और नमकीन का अहम हिस्सा हैं।
रॉयटर्स ने संगठन के डायरेक्टर जनरल फिरोज नकवी के हवाले से लिखा है कि अगर प्रस्ताव इसी तरह लागू हुआ तो सभी पैकेज्ड मिठाइयों और नमकीन पर वॉर्निंग लेबल लग जाएगा। इससे ग्राहकों के मन में इन चीजों को लेकर खराब धारणा बन सकती है और बिक्री पर असर पड़ सकता है।
मामला सिर्फ लेबल का नहीं, बढ़ते मोटापे का भी है
सरकार की चिंता की वजह भारत में बढ़ता मोटापा और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता बाजार है। एक स्टडी के मुताबिक, 2021 में भारत में करीब 18 करोड़ एडल्ट ओवरवेट या मोटापे की समस्या से जूझ रहे थे, और 2050 तक यह संख्या करीब 45 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकार ने यह भी चिंता जताई है कि भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री तेजी से बढ़ी है। यानी सरकार के सामने सवाल बड़ा है- लोगों को पैकेट देखकर तुरंत पता चले कि खाने में क्या ज्यादा है, लेकिन नियम ऐसे भी न हों कि हर दूसरे पैकेट पर लाल निशान दिखने लगे। अब 10 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में इस बहस पर आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
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