Operation Global Hunt: विदेश में बैठे 20 ड्रग स्मगलर्स को भारत लाने की तैयारी; 100 से ज्यादा की पहचान, रेड कॉर्नर नोटिस जारी होंगे
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भारतीय एजेंसियों ने विदेश में बैठे ड्रग स्मगलर्स को भारत लाने के लिए ऑपरेशन ग्लोबल हंट (Operation Global Hunt) शुरू किया है। (AI Generated Image)
नेशनल डेस्क। विदेश में बैठकर भारत में ड्रग नेटवर्क चलाने वाले स्मगलर्स के खिलाफ भारतीय एजेंसियों ने ऑपरेशन ग्लोबल हंट (Operation Global Hunt) शुरू किया है। इसके तहत गल्फ और यूरोपीय देशों में मौजूद करीब 20 ड्रग स्मगलर्स को भारत वापस लाने की तैयारी है।
जांच एजेंसियां अब तक विदेश से ऑपरेट कर रहे 100 से ज्यादा लोगों की पहचान कर चुकी हैं। इनमें कोकीन, हेरोइन और LSD समेत दूसरे ड्रग्स की तस्करी से जुड़े संदिग्ध शामिल हैं। ऑपरेशन में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, CBI, NCB, राज्यों की जांच एजेंसियां और इंटरपोल मिलकर काम कर रहे हैं।
विदेश में बैठे 100 से ज्यादा स्मगलर्स की पहचान
जांच एजेंसियों ने ड्रग तस्करी के मामलों की जांच के दौरान ऐसे 100 से ज्यादा स्मगलर्स की पहचान की है, जो फिलहाल विदेश में रह रहे हैं। इनमें से करीब 20 लोगों को पहले भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। एजेंसियों का फोकस खास तौर पर गल्फ और यूरोपियन कंट्री में मौजूद स्मगलर्स पर है। दावा है कि इनमें से कई लोग लंबे समय से विदेश में रहकर ड्रग नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। ये स्मगलर्स भारत समेत कई दूसरे देशों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने में शामिल हैं।

केरल पुलिस को 12 लोगों की तलाश
ऑपरेशन के तहत जिन लोगों की पहचान हुई है, उनमें 12 स्मगलर ऐसे हैं, जिनकी केरल पुलिस को ड्रग से जुड़े अलग-अलग मामलों में तलाश है। इनमें कुछ मलयाली भी हैं, जो कई साल से विदेश में रह रहे हैं। बाकी स्मगलर्स के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB में केस दर्ज हैं। एजेंसियां अब इन स्मगलर्स से जुड़े पुराने मामलों, उनके मौजूदा ठिकानों और विदेश में बने नेटवर्क की जानकारी संबंधित देशों के साथ शेयर कर उन्हें भारत लाने का प्रोसेस शुरू करेंगीं।
यूरोप-गल्फ से कोकीन, हेरोइन और LSD की तस्करी का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, विदेश में मौजूद इन स्मगलर्स में से कई ड्रग सप्लाई नेटवर्क की अहम कड़ी हैं। इन नेटवर्क पर यूरोप और गल्फ देशों से कोकीन, हेरोइन, LSD और दूसरे ड्रग्स की तस्करी करने का आरोप है। ड्रग्स सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है। विदेश में बैठे इन संदिग्धों के लिए काम करने वाले कई एजेंट पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इन्हीं गिरफ्तारियों और आगे की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक एजेंसियां पहुंची हैं।

रेड कॉर्नर नोटिस, फिर पासपोर्ट होगा कैंसिल
स्मगलर्स को भारत लाने के लिए कई लेवल पर एक्शन लिया जाएगा। सबसे पहले उनके खिलाफ इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद उनके इंडियन पासपोर्ट कैंसिल करने की कार्रवाई होगी। इससे विदेश में उनके लिए कानूनी तौर पर रहना और दूसरे देशों में ट्रैवल करना मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही भारत उन देशों की अथॉरिटीज से संपर्क करेगा जहां ये छुपे हुए हैं। उनसे स्मगलर्स के डिपोर्टेशन या दूसरे लीगल प्रोसेस के जरिए उन्हें वापस भेजने के लिए मदद मांगेगा।
CBI-NCB के साथ विदेश मंत्रालय भी ऑपरेशन में
ऑपरेशन ग्लोबल हंट किसी एक एजेंसी का ऑपरेशन नहीं है। इसमें CBI और NCB के साथ अलग-अलग राज्यों की जांच एजेंसियां काम कर रही हैं। गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय भी इस पूरी कार्रवाई में शामिल हैं। विदेश में मौजूद स्मगलर्स का पता लगाने और उनके खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर शिकंजा कसने के लिए इंटरपोल की मदद ली जा रही है। वहीं संबंधित देशों की सरकारों और एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेशन में विदेश मंत्रालय भी अहम रोल में होगा।
भारत पहुंचते ही होगी गिरफ्तारी
ऑपरेशन का मकसद विदेश में बैठे स्मगलर्स को भारत वापस लाकर उनके खिलाफ दर्ज मामलों में सजा दिलाना है। दूसरे देश से डिपोर्ट किए जाने के बाद भारत पहुंचते ही स्मगलर्स को गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद जिस एजेंसी या राज्य की पुलिस में उनके खिलाफ केस दर्ज है, उन्हें उसके हवाले कर दिया जाएगा। फिलहाल करीब 20 स्मगलर्स को वापस लाने पर फोकस है, लेकिन विदेश में ऑपरेट कर रहे 100 से ज्यादा संदिग्धों को आइडेंटिफाई कर लिया गया है। ऐसे में बहुत मुमकिन है आने वाले समय में 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' का दायरा और बढ़ सकता है।

पहले ही 4 बड़े ड्रग स्मगलर भारत लाए गए
ऑपरेशन ग्लोबल हंट के बीच एजेंसियों को इससे पहले भी बड़ी कामयाबी मिल चुकी है। NCB चार हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल ड्रग स्मगलर्स को विदेश से भारत ला चुकी है। इनमें वीरेंद्र सिंह बसोया को UAE, प्रभदीप सिंह को अजरबैजान और रितिक बजाज को UAE से भारत लाया गया। वहीं मोहम्मद सलीम डोला को मलेशिया में पकड़े जाने के बाद तुर्किये के रास्ते भारत लाया गया। यानी अब जिन करीब 20 स्मगलर्स पर फोकस है, उससे पहले भी इसी तरह विदेश में मौजूद स्मगलर्स के खिलाफ एक्शन लिया जा चुका है।
बसोया का नाम 13 हजार करोड़ के ड्रग केस से जुड़ा
इनमें वीरेंद्र सिंह बसोया का मामला सबसे बड़ा है। जांच एजेंसियों ने उसे करीब 13 हजार करोड़ रुपए के इंटरनेशनल ड्रग नेटवर्क से जोड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, उस पर विदेश में बैठकर नेटवर्क की फंडिंग और ऑपरेशन में भूमिका निभाने का आरोप है। बसोया के बेटे ऋषभ बसोया और दूसरे साथियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
भारत में पकड़े एजेंटों से विदेश तक पहुंचीं एजेंसियां
इस ऑपरेशन की एक अहम कड़ी भारत में पहले से पकड़े जा चुके एजेंट और सप्लायर हैं। जांच में इन लोगों से पूछताछ के साथ उनके डिजिटल डिवाइस, बैंकिंग रिकॉर्ड, चैट और कॉल डिटेल खंगाली गईं। इसी के आधार पर विदेश में बैठकर कथित तौर पर ड्रग नेटवर्क ऑपरेट करने वाले लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। एजेंसियों का फोकस यह पता लगाने पर भी है कि ड्रग्स कहां से भेजे गए, भारत में उन्हें किसने रिसीव किया और पेमेंट किस चैनल से किया गया।
7 साल में 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए
ऑपरेशन ग्लोबल हंट विदेश में छिपे भारत के आरोपियों को वापस लाने की बड़ी मुहिम है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत 36 देशों से 274 भगोड़े आरोपियों को वापस ला चुका है। इनमें आतंकवाद, हत्या, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, इकोनॉमिक ऑफेंस, ड्रग स्मगलिंग और मानव तस्करी से जुड़े मामलों के आरोपी शामिल हैं। इनमें 16 लोग ड्रग पेडलिंग से जुड़े मामलों में वॉन्टेड थे।
केरल सरकार अलग से चला रही ऑपरेशन तूफान
एक ओर जहां केंद्र सरकार सभी राज्यों के कोऑर्डिनेशन से ऑपरेशन ग्लोबल हंट चला रही है, वहीं, दूसरी ओर केरल पुलिस ऑपरेशन तूफान चला रही है। ऑपरेशन तूफान का फोकस केरल के अंदर ड्रग मामलों, गिरफ्तारियों और लोकल नेटवर्क पर है। वहीं ग्लोबल हंट का निशाना विदेश में मौजूद आरोपी हैं। हालांकि केरल में हुई जांच के दौरान अगर किसी विदेशी सप्लायर या ऑपरेटर का नाम सामने आता है, तो उसके खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर एक्शन तेज कर दिया जाता है।

