ओल्ड एज होम में शख्स की मौत: अंतिम विदाई में भी शामिल नहीं हुईं बेटियां; 5100 रुपए भेज वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार
Published:
3 min read

शिवचरण रतन गुप्ता की सोनीपत ओल्ड एज होम में मौत हो गई। उनकी तीन बेटियों में एक भी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई।
'कसमें, वादे, प्यार, वफा... सब बातें हैं, बातों का क्या। कोई किसी का नहीं, ये झूठे नाते हैं, नातों का क्या...', ये लाइनेें 1967 में आई फिल्म 'उपकार' के एक गाने की हैं, इन्हें इंदीवर ने लिखा है... अब 59 साल बाद हरियाणा के सोनीपत की घटना ने इस गाने को चरितार्थ कर दिया।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के सोनीपत में बुजुर्ग कपड़ा व्यापारी शिवचरण रतन गुप्ता का एक वृद्धाश्रम में निधन हो गया। चौंकाने वाली बात ये है कि शिवचरण की तीन बेटियों में से एक भी उनके अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंची। इसके बजाय बेटियों ने नेपाल, यूपी और मुंबई से वीडियो कॉल के जरिए पिता का अंतिम संस्कार देखा।
बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर बनाया
महाराष्ट्र के शिवचरण रतन गुप्ता कभी बड़े कपड़ा व्यापारी थे। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर बनाया। इनमें से दो टीचर है। करीब डेढ़ साल पहले वे अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रहने आए थे। उनकी पत्नी का कुछ समय पहले निधन हो गया।
लंबी बीमारी के चलते शिवचरण गुप्ता का मंगलवार को निधन हो गया। वृद्धाश्रम के मैनेजमेंट ने उनकी तीनों बेटियों को इसकी सूचना दी। हालांकि, बेटियों अंतिम संस्कार में शामिल होने सोनीपत नहीं आईं। उन्होंने वीडियो कॉल से अंतिम संस्कार देखा वृद्धाश्रम और स्थानीय लोगों की मदद से अंतिम संस्कार किया गया।
बीमार पिता को देखने नहीं आईं बेटियां
वृद्धाश्रम की देखरेख करने वाले आनंद कुमार के मुताबिक, गुप्ता कभी कभी फोन पर अपनी बेटियों से बात करते थे। लेकिन बीमार होने के बाद बेटियों का फोन आना कम हो गया। आनंद कुमार ने बताया कि करीब 20 दिन पहले बेटियों को गुप्ता के बीमार होने की जानकारी दी गई थी। लेकिन एक भी बेटी उनसे मिलने नहीं आई।
बेटी ने अंतिम संस्कार के लिए 5100 रुपए दिए
शिवचरण गुप्ता के निधन के बाद वृद्धाश्रम ने बेटियों को फोन कर इसकी सूचना दी और कहा कि अंतिम संस्कार के लिए उन्हें सोनीपत आना होगा। लेकिन बेटियों ने कहा कि उनके पास समय नहीं है। नेपाल में रहने वाली बेटी अनीता ने वृद्धाश्रम को 5100 रुपए ट्रांसफर किए और कहा कि उनके पिता अंतिम संस्कार विधि विधान से किया जाए।
अंतिम संस्कार के बाद बेटियों ने वीडियो भी भेजने के लिए कहा। इतना ही नहीं अंतिम संस्कार के दौरान एक बेटी को यह कहते सुना गया कि ये कितनी देर चलेगा, हमें नहाना और खाना भी है।
'अस्थियां गंगा में बहा दीजिए'
शिवचरण की बेटियों ने वृद्धाश्रम से कहा था कि उनके पिता की अस्थियां सुरक्षित रखी जाएं। लेकिन बाद में फोन करके कहा है कि उनके पास सोनीपत आने का टाइम नहीं है। इसलिए अस्थियों को वृद्धाश्रम के लोग ही गंगा में बहा दें।

