भारत का रूस से तेल खरीदना गैरकानूनी नहीं: हरदीप सिंह पुरी का ट्रम्प के ट्रेड एडवाइजर को जवाब- EU प्राइस कैप सिस्टम के अंदर ही सारी डील्स हुईं
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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्रम्प के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो के आरोपों को झूठा करार दिया है। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्रम्प के ट्रेड एडवाइजर के आरोपों पर जवाब दिया है। पुरी ने कहा- कुछ आलोचक कहते हैं कि भारत रूस का लॉन्ड्रोमैट है, यह बिल्कुल गलत है। भारत ने कोई भी नियम नहीं तोड़ा। रूस का तेल खरीदना गैरकानूनी नहीं है, क्योंकि यह किसी भी प्रतिबंधित कैटेगरी में नहीं आता। G-7 और यूरोपीय यूनियन के प्राइस कैप सिस्टम के अंदर ही सारी डील्स हुईं। इन आरोपों को झूठ करार दिया।
नवारो के कहा था- ये मोदी की जंग
व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने बीते हफ्ते सोशल मीडिया पर भारत पर आरोप लगाए थे। नवारो ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग दरअसल मोदी की जंग है। भारत यूक्रेन जंग के लिए पैसे बनाने वाली वॉशिंग मशीन की तरह काम कर रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब और ऑयल लॉन्ड्रोमैट बन गया है, जो रूस का तेल खरीदकर उसे प्रोसेस कर पश्चिमी देशों को बेच रहा है। इससे होने वाले मुनाफे का हिस्सा रूस तक पहुंचा भी रहा है।
हमने कोई प्रॉफिट गेम नहीं खेला
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों को झूठ करार दिया। द हिंदू में लिखे एक आर्टिकल में पुरी ने याद दिलाया कि भारत दशकों से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम एक्सपोर्टर है और यह स्थिति जंग से पहले भी थी।
भारत की रिफाइनिंग वॉल्यूम और मार्जिन पहले जैसे ही हैं, यहां कोई प्रॉफिट गेम नहीं खेला गया। उल्टा, रूस से सस्ता तेल लेने के कारण दुनिया में सप्लाई स्टेबल रही। कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंचीं। CLSA की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत रूस से तेल लेना बंद कर दे तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक उछल जाएंगी।
आम जनता को राहत देना प्राथमिकता
पुरी ने कहा- सरकार ने घरेलू ग्राहकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। तेल कंपनियों ने डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर तक का घाटा झेला। केंद्र और राज्य सरकारों ने टैक्स घटाए, और नियम बनाए कि एक्सपोर्ट करने वाले रिफाइनर्स को घरेलू बाजार में भी कम से कम 50% पेट्रोल और 30% डीजल बेचना होगा। इसका असर यह हुआ कि संकट के दौर में भी भारत में न तो पेट्रोल-डीजल की कमी हुई और न ही आम जनता पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ा।
भारत ने फ्यूल की कीमतें नहीं बढ़ने दीं
पुरी ने कहा कि रूस जैसा बड़ा प्रोड्यूसर अगर तेल सप्लाई से हट जाए तो पूरी दुनिया हिल जाएगी। ऐसे में भारत की पॉलिसी ने हालात को संभाला। जो उंगली उठा रहे हैं, वे ये भूल जाते हैं कि भारत ने सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया और दुनिया में फ्यूल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भी रोका।

