नोएडा के निठारी केस में बरी सुरेंद्र कोली की मौत: हरिद्वार में चाय की दुकान में फांसी लगाई
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सुरेंद्र कोली को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया था।
नेशनल डेस्क. नोएडा के चर्चित निठारी केस में बरी हुए सुरेंद्र कोली की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, कोली ने आत्महत्या कर ली।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेंद्र कोली नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद हरिद्वार में रहने लगा था। वहां उसने कुछ दिन पहले चाय की दुकान खोल ली थी। वहीं, कोली ने फांसी लगाई।

निठारी केस क्या था?
निठारी कांड नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में 2005-06 के दौरान कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने और दिसंबर 2006 में मानव कंकाल मिलने के बाद सामने आया।
29 दिसंबर 2006 को नोएडा में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर के D-5 मकान के पीछे नाले से मानव कंकाल और अन्य सामान बरामद किए गए। बाद में आसपास की जगहों की तलाशी में और शरीर के अंग मिले। पुलिस ने पंधेर के नौकर सुरेंद्र कोली और पंधेर को गिरफ्तार किया था। मामले में अलग-अलग पीड़ितों से जुड़ीं 19 FIR दर्ज हुईं।

CBI जांच में क्या हुआ?
जनवरी 2007 में जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने निठारी के D-5 मकान और आसपास सर्च की। शवों के टुकड़े और अन्य सामग्री बरामद की। CBI के अनुसार, सुरेंद्र कोली ने मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 CrPC के तहत बयान, अपने गुनाह कबूल किए थे।
2009 में पहला बड़ा फैसला
13 फरवरी 2009 को गाजियाबाद की विशेष CBI अदालत ने एक 14 साल की लड़की के रेप और हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर दोनों को मौत की सजा सुनाई। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को इस मामले में बरी कर दिया, जबकि कोली की सजा बरकरार रखी।
जनवरी 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मर्सी पेटिशन के निपटारे में देरी को आधार मानते हुए कोली की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
फिर 2017 में मौत की सजा
निठारी से जुड़े अन्य मामलों में भी ट्रायल चलता रहा। 2017 में स्पेशल CBI कोर्ट ने कोली और पंधेर को एक अन्य महिला से रेप और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। कुल मिलाकर कोली को निठारी से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा मिली थी।
2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी किया। मोनिंदर सिंह पंधेर को 2 मामलों में बरी किया। तब हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। साथ ही कोर्ट ने जांच में भी कमियां बताईं।
2023 के हाईकोर्ट फैसले के बाद पंधेर को राहत मिली, लेकिन सुरेंद्र कोली जेल में रहा, क्योंकि एक अन्य मामले में उसकी उम्रकैद की सजा बनी हुई थी। CBI और पीड़ित परिवारों ने हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने 14 अपीलें खारिज कीं
30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI और पीड़ित परिवारों की ओर से दाखिल 14 अपीलें खारिज कर दीं, जिनमें 2023 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। लेकिन कोली अभी भी एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में था।
नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी कोली को बरी किया
11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कोली की क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ बचे आखिरी मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी करने का आदेश दिया। तीन जजों की बेंच में तत्कालीन CJI बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
बेंच ने अपने फैसले में कहा- गंभीर संदेह भी उचित संदेह से परे अपराध साबित करने का विकल्प नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों और जांच में खामी बताई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नवंबर 2025 में करीब 19 साल जेल में रहने के बाद सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आ गया था।

