रूस का इनपुट, NIA की 3 महीने की मशक्कत: US नागरिक मैथ्यू वैनडाइक समेत 7 विदेशियों के गिरफ्तारी की Inside Story
Published:
3 min read

NIA ने 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनपर म्यांमार में विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग देने का आरोप है।
नेशनल डेस्क. भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने देश में उग्रवाद फैलाने के मामले में 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक अमेरिकी और 6 यूक्रेनी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, रूसी अधिकारियों से इस ग्रुप का इनपुट मिला था। ये सभी मिजोरम से म्यांमार की सीमा में घुसे थे और वहां विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दी थी। इतना ही नहीं आरोप है कि इस ग्रुप ने यूरोप से ड्रोन्स की खेप लाकर भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचाई थी।
रूस से मिले इनपुट के बाद NIA ने इन लोगों के खिलाफ जांच शुरू की और तीन महीने की मशक्कत के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया। NIA ने 13 मार्च को US सिटीजन मैथ्यू वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। इसके अलावा तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ एयरपोर्ट से और तीन को दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा गया। इनकी पहचान हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर के तौर पर हुई है। इनके खिलाफ अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1967 की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया।
मददगारों की तलाश जारी
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह ग्रुप 2024 से म्यांमार जा रहा था। इन पर विद्रोही गुटों को ड्रोन और जैमिंग इक्विपमेंट की डिलीवरी करने और ट्रेनिंग देने का भी शक है। जांच एजेंसी अब उन लोगों की तलाश में जुटी है, जिन्होंने इनकी मिजोरम और वहां से म्यांमार जाने में मदद की। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इनके साथ कोई बड़ा नेटवर्क तो शामिल नहीं है।
माना जा रहा है कि ये 6 यूक्रेनी नागरिक म्यांमार गए 14 लोगों के ग्रुप का हिस्सा थे। बाकी आठ लोगों का पता लगाने में जुटे हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वे अभी भी म्यांमार में हैं या भारत के रास्ते निकल गए हैं।
यूक्रेन के नागरिकों के वकील ने केस छोड़ा
अधिकारियों के मुताबिक, NIA की टीम नॉर्थ ईस्ट में पिछले 3 महीने से जांच कर रही है। हालांकि, NIA के प्रवक्ता ने मामले में ज्यादा जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, समय आने पर बाकी की जानकारी दी जाएगी।
उधर, यूक्रेनी नागरिकों की तरफ से पेश भारतीय वकील ने प्रोफेशनल रीजन्स का हवाला देते हुए केस से नाम वापस ले लिया। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि उसे इस मामले की जानकारी है, लेकिन उसने इस पर बयान देने से इनकार कर दिया। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में NSA अजीत डोभाल से मुलाकात की और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ कि इस मामले पर बातचीत हुई या नहीं। यूक्रेन ने भी इस मामले में भारतीय एजेंसियों के सहयोग की बात कही है।
विद्रोहियों को ड्रोन ट्रेनिंग देना था मकसद
NIA के मुताबिक, ये विदेशी नागरिक वीजा लेकर भारत आए। इसके बाद वे मिजोरम से म्यांमार चले गए। जहां उन्होंने भारत में अलगाववाद फैला रहे संगठनों से कॉन्टैक्ट किया।
जांच एजेंसी को शक है कि ये लोग प्लान के तहत भारत में आए थे। इनका मकसद देश में मौजूद कुछ एथनिक आर्म्ड ग्रुप को ड्रोन के जरिए वॉरफेयर की ट्रेनिंग देना था। इसके अलावा इन पर यूरोप से भारत के रास्ते बड़ी मात्रा में ड्रोन तस्करी करने का आरोप भी है। फिलहाल, एजेंसी मामले की जांच में जुटी है।
मामले की सुनवाई के दौरान एजेंसी ने बेंच को बताया कि जब्त किए गए मोबाइल फोन और डिजिटल एविडेंस का फोरेंसिक एनालिसिस किया जा रहा है।

