कौन है अमेरिकी भाड़े का सैनिक मैथ्यू वैनडाइक: नार्थईस्ट में उग्रवादियों को ट्रेनिंग दी, उन तक ड्रोन पहुंचाए; लीबिया में रह चुका युद्धबंदी
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(NIA) ने भारत में अवैध गतिविधियों के आरोप में अमेरिकी भाड़े के सैनिक मैथ्यू वैनडाइक समेत 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है।
नेशनल डेस्क. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने भारत में अवैध गतिविधियों के आरोप में अमेरिकी भाड़े के सैनिक मैथ्यू वैनडाइक समेत 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें 6 यूक्रेनी नागरिक भी शामिल हैं। एजेंसी के मुताबिक ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुए। वहां इन्होंने सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने का काम किया। जांच में अब इस पूरे नेटवर्क के तार बांग्लादेश और नोर्थ-ईस्ट में चल रही गतिविधियों से भी जोड़े जा रहे हैं।
एजेंसी का आरोप है कि ये लोग नोर्थ-ईस्ट में अस्थिरता फैलाने की गतिविधियों में शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इनकी गतिविधियां सिर्फ म्यांमार तक सीमित नहीं थीं, बल्कि भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी असर डाल सकती थीं। इसी वजह से मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन है मैथ्यू वैनडाइक
मैथ्यू वैनडाइक को कॉन्फ्लिक्टेड रीजन्स में एक्टिव भाड़े के सैनिक के रूप में जाना जाता है। वह लीबिया और सीरिया जैसे देशों में आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट का हिस्सा रह चुका है। 2011 में लीबिया में उसे युद्धबंदी भी बनाया गया था। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम की संस्था का संस्थापक है, जो खुद को नॉन-प्रॉफिट सिक्योरिटी फर्म बताती है और अलग-अलग ग्रुप्स को ट्रेनिंग देती है।
मिजोरम के रास्ते म्यांमार में घुसपैठ
NIA के मुताबिक आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया। विदेशी नागरिकों को मिजोरम में प्रवेश के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट जरूरी होता है। इसके बावजूद ये लोग मिजोरम के रास्ते म्यांमार के चिन इलाके में अवैध रूप से दाखिल हुए। जांच में सामने आया है कि यह रूट अब ऐसे नेटवर्क के लिए एंट्री प्वाइंट बनता जा रहा है।
आर्म्ड ग्रुप्स को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई
एजेंसी का दावा है कि इन विदेशी नागरिकों ने म्यांमार में जातीय आर्म्ड ग्रुप्स को हथियारों की ट्रेनिंग दी। इन समूहों पर नोर्थ-ईस्ट में एक्टिव उग्रवाइी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा आरोप है कि यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप मंगवाकर मिजोरम के जरिए इन ग्रुप्स तक पहुंचाई गई। इससे पूरे मामले में एक ऑर्गनाइज्ड इंटरनेशनल नेटवर्क के तार जुड़े होने की बात सामने आई है।
बांग्लादेश और प्रदर्शन से जुड़ते तार
जांच एजेंसियां इस मामले के लिंक बांग्लादेश में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट से भी जोड़कर देख रही हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि इन गतिविधियों और बांग्लादेश में हुई अस्थिरता के बीच कोई कनेक्शन हो सकता है। इसी संदर्भ में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 2024 के बयान की भी चर्चा फिर से शुरू हो गई है, जिसमें उन्होंने एक ‘क्रिश्चियन स्टेट’ बनाए जाने की आशंका जताई थी।
नेटवर्क को लेकर क्या कहते हैं जियोपॉलिटकल एक्सपर्ट
जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि यह मामला प्रॉक्सी वॉर के नए रूप की ओर इशारा करता है। ऐसी एक्टिविटी भारत के नोर्थ-ईस्ट तक पहुंच चुकी हैं। कुछ सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल किसी इलाके में प्रभाव बढ़ाने और स्ट्रैटेजिक मॉनिटरिंग के लिए किया जा सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
CM ने विदेशियों के एक्टिव होने का जिक्र किया था
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मार्च 2025 में विधानसभा में कहा था कि विदेशी लड़ाके राज्य के रास्ते म्यांमार में घुस रहे हैं। उन्होंने बताया था कि 2024 में हजारों विदेशी नागरिक आईजोल आए, लेकिन कई लोगों का रिकॉर्ड साफ नहीं था। इस इनपुट के बाद से ही एजेंसियां इस रूट पर नजर बनाए हुए थीं। अब हालिया गिरफ्तारियों के बाद इन आशंकाओं को और मजबूती मिली है।

