टैरिफ वॉर के बीच भागवत का बड़ा बयान: RSS प्रमुख बोले- अंतरराष्ट्रीय व्यापार सिर्फ स्वेच्छा से होना चाहिए, दबाव में नहीं
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- दुनिया के सामने उदाहरण बनने के लिए समाज की सोच को बदलना होगा।
नेशनल डेस्क. RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ के बीच बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा- अंतरराष्ट्रीय व्यापार सिर्फ स्वेच्छा से होना चाहिए, दबाव में नहीं। संघ प्रमुख नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, उत्तर क्षेत्र के प्रांत संघचालक पवन जिंदल और दिल्ली के संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल मंच पर मौजूद रहे।
उन्होंने कहा- दुनिया के सामने उदाहरण बनने के लिए समाज की सोच को बदलना होगा। इसकी शुरुआत घर से करनी होगी। बदलाव के पांच तरीके हैं - कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों का पालन करना होगा। आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी को प्राथमिकता देना होगा। भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल स्वेच्छा से होना चाहिए, किसी दबाव में नहीं।
'संघ कार्य कैसे चलता है'
उन्होंने कहा, संघ का कार्य शुद्धता, प्रेम और समाजनिष्ठा पर आधारित है। संघ का स्वयंसेवक कोई व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा नहीं रखता है। जीवन की सार्थकता और मुक्ति की अनुभूति इसी सेवा से होती है। आम लोगों से दोस्ती करना, कोई अच्छा काम करता है तो उसे प्रत्साहित करना और खुश होना। यही संघ का जीवन मूल्य है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा- हमारे ऋषि-मुनियों ने सिखाया है कि जीवन अपने लिए नहीं है। भारत को दुनिया में बड़े भाई की तरह फर्ज निभाना होगा। इससे विश्व कल्याण का विचार जन्म लेगा। यह सत्य, प्रेम और अपनापन है।
दुनिया किस दिशा में जा रही है
मोहन भागवत ने दुख जताते हुए कहा- दुनिया कट्टरता और अशांति की ओर बढ़ रही है। दूसरी ओर महात्मा गांधी के सात सामाजिक पापों के बारे में बताया। उन्होंने काम बिना परिश्रम, आनंद बिना विवेक, ज्ञान बिना चरित्र, व्यापार बिना नैतिकता, विज्ञान बिना मानवता, धर्म बिना बलिदान और राजनीति बिना सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा- इनसे समाज में असंतुलन बनता गया है।

