कथित वोट चोरी पर हंगामा : बैरिकेडिंग से कूदे अखिलेश, हिरासत में थे राहुल-प्रियंका..अब रिहा; बीजेपी बोली- वोट नहीं मिला तो हम क्या करें
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2024 लोकसभा चुनावों में कथित 'वोट चोरी' और SIR के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने राहुल गांधी की अगुवाई में साेमवार को रैली निकाली। इस दौरान अखिलेश यादव बैरिकेडिंग से कूद गए।
2024 के लोकसभा चुनाव में कथित 'वोट चोरी' और बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) के खिलाफ विपक्ष ने आज प्रदर्शन किया। सोमवार सुबह 25 विपक्षी दलों के सैकड़ों सांसदों ने रैली निकाली। रैली की अगुवाई लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने की। ये रैली मार्च की शक्ल में संसद भवन परिसर से शुरू हुई। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि वो चुनाव आयोग के दफ्तर तक जाएंगे।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने थोड़ी देर बाद ही विपक्षी सांसदों को रोक दिया। सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव बैरिकेडिंग से कूद गए। इसके बाद कई दूसरे नेताओं ने भी ऐसा करने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने सभी को वहीं रोक दिया। राहुल और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में छोड़ दिया। प्रदर्शन के दौरान TMC सांसद मिताली बाग बेहोश हो गईं। TMC सांसद महुआ मोइत्रा भी गर्मी की वजह से परेशान दिखीं।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार सच बोलने से डरती है, जबकि देश के सामने हकीकत साफ है। यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि संविधान बचाने की है। यह वन मैन, वन वोट के सिद्धांत और एक साफ-सुथी वोटर लिस्ट की मांग के लिए है।
रविशंकर प्रसाद बोले- वोट नहीं मिल रहा तो हम क्या करें
बीजेपी के सीनियर नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा- आपको (विपक्ष) वोट नहीं मिल रहा है, तो हम क्या करें। राहुल गांधी के पास प्रूफ तो है ही नहीं। बस आरोप लगाते रहते हैं।
वहीं, केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने कहा- ऐसा गैर-जिम्मेदार विपक्ष नहीं देखा। अगर सिर्फ हंगामा ही करना था तो सांसद क्यों बने। हम देश की संसद का समय और पैसा बर्बाद नहीं होंने देंगे।
दिल्ली पुलिस बोली- रैली के लिए इजाजत नहीं ली गई थी
रैली में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राजद, शिवसेना (UBT) और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई दलों के सांसद शामिल रहे। उधर, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रैली के लिए पहले से इजाजत नहीं ली गई थी। विपक्षी सांसदों की रैली के मद्देनजर चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। आयोग के दफ्तर से दो किलोमीटर पहले बैरिकेडिंग कर दी गई थी।
डिजिटल मतदाता सूची जारी करें ECI- राहुल गांधी
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को रैली से पहले एक्स पर पोस्ट किया- "वोट चोरी 'वन मैन, वन वोट' के मूल विचार पर हमला है। फ्री एंड फेयर चुनाव के लिए मतदाता सूची जरुरी है। भारतीय चुनाव आयोग से मांग है कि पारदर्शी बनें। डिजिटल वोटर लिस्ट जारी करें जिससे लोग और पार्टियां उनका ऑडिट कर सकें।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा- हमारे लोकतंत्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यूपी में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। इनमें ना सिर्फ वोटों की चोरी हुई बल्कि बूथों पर कब्जा किया गया। चुनाव आयोग ने उन अफसरों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया जो राज्य सरकार के ऑर्डर पर काम कर रहे थे।
रूडी बोले- मार्च निकालने के बजाय विपक्ष गांवों में जाए
भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा- यहां मार्च निकालने के बजाय उन्हें (विपक्ष को) गांवों और ग्रामीण इलाकों में जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो लोग अभी तक मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें इसमें जोड़ा जाए।
BJP सांसद बोले- बांग्लादेशी वोटर्स के सहारे जीतती आ रही कांग्रेस
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने कहा बांग्लादेशी वोटर के सहारे ही कांग्रेस जीत सकी है। ये साजिश 1972-73 से जारी है। बांग्लादेश जब बना और उसके बाद 1975 में जब शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या हुई। उसके बाद से ही बांग्लादेशी घुसपैठी यहां आकर बस गए।
उसके अलावा उन्होंने कहा- ये चुनाव भारत के वोटर से होगा? या बांग्लादेशी वोटर से? अगर बांग्लादेशी वोटर्स से जीतने की मंशा है तो भारतीय जनता पार्टी पूरा नहीं होने देगी।
वहीं, बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा- एक हफ्ते के ड्रामा के बाद विपक्षी सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की। सरकार इसके लिए राजी हो गई और उन्हें मुंह की खानी पड़ी।
विपक्ष ने तय किया वे संसद की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। 15 दिन बाद उन्होंने सोचा कि उन्हें इलेक्शन कमीशन के पास जाकर बात करना चाहिए। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से कहा कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो कुछ भी कहा लिखित रूप में दे। क्या वे इतना भी नहीं कर सकते।
वोटर लिस्ट को लेकर इतना बवाल क्यों
दरअसल, 24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का ऐलान किया था। चुनाव आयोग का कहना है कि लगातार पलायन, युवा वोटरों को शामिल करने, मौतों की सूचना न देने, अवैध विदेशी प्रवासियों के शामिल होने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए वोटर लिस्ट रिवीजन जरूरी है। इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गलतियों को सुधारा जा सकेगा।
अब विवाद का विषय यह है कि विपक्ष को लगता है कि इस प्रक्रिया से लाखों लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि नए नियमों के तहत हर मतदाता को दस्तावेज जमा करना जरूरी है, जबकि बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास जरूरी कागजात नहीं हैं। इससे दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष को लगता है कि ये फैसला बिहार चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में लिया गया है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले से सिर्फ बीजेपी और NDA को फायदा होगा। चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि प्रक्रिया पारदर्शी है। सभी को दस्तावेज जमा करने के पर्याप्त मौके मिलेंगे। हालांकि, विपक्ष संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी है।

