देशभर में ड्रग्स के 3.9 केस पेंडिंग: इनमें से पंजाब में 60 हजार; केंद्र का राज्यों को स्पेशल कोर्ट बनाने का निर्देश, ताकि जल्द हो इनका निपटारा
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भारत में ड्रग्स से जुड़े मामले के 3.9 केस पेंडिंग हैं। केंद्र और सुप्रीम कोर्ट इन्हें जल्द निपटाने के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का निर्देश दे चुकी है।
नेशनल डेस्क. देशभर में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट के 3.9 केस पेंडिंग हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इन मामलों के जल्द निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का निर्देश दिया है। दरअसल, गृह मंत्रालय को हाल ही में एक बैठक में जानकारी मिली थी कि 22 राज्यों में अब तक NDPS केसों के निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट नहीं बनाई गई हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने पिछले 6 महीने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और गृह सचिवों के साथ कई बैठकें की हैं, इनमें उन्हें जल्द से जल्द स्पेशल NDPS कोर्ट बनाने के लिए कहा गया है। अकेले पंजाब में NDPS के लगभग 60,000 मामले पेंडिंग हैं, लेकिन कोई स्पेशल कोर्ट नहीं बनाई गई है। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से बताया गया है कि गृह मंत्रालय ने लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, तरनतारन और संगरूर में 5 स्पेशल NDPS कोर्ट बनाने का सुझाव दिया है।
पेंडिंग केस के मामले में केरल दूसरे नंबर पर
केरल ड्रग्स के पेंडिंग केस के मामले में दूसरे नंबर पर है। यहां करीब 50 हजार केस पेंडिंग है और अब तक सिर्फ दो कोर्ट बनी हैं, जबकि यहां 9 स्पेशल कोर्ट का सुझाव दिया गया है। ओडिशा में ड्रग्स के 17 हजार केस पेंडिंग हैं, अधिकारियों के मुताबिक, यहां इस साल 8 स्पेशल कोर्ट सेटअप किए जाएंगे। जबकि 2027-28 में 7 कोर्ट बनाने की तैयारी है।

सूत्रों के मुताबिक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने स्पेशल कोर्ट और NDPS एक्ट के तहत मुकदमों में तेजी लाने के लिए जरूरी कदम को लेकर बैठक में प्रेजेंटेशन दिया। NCB ने बताया कि देश में सिर्फ 65 स्पेशल कोर्ट सेटअप की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई
रिपोर्ट में बताया गया है कि बैठक में यह बताया गया है कि ड्रग्स के केस पेंडिंग होने पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के मामले में कई आरोपी, गवाह और कोर्ट में बहस के दौरान कई वकील शामिल होते हैं, इसके चलते पूछताछ और बहस लंबी होती है। इसलिए नियमित अदालतों पर बोझ डालने के बजाय स्पेशल कोर्ट की जरूरत है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए स्पेशल कोर्ट बनाने पर गृह मंत्रालय को एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

