NDA में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होगी NCPI: कैसे खुले 3 साल पुरानी पार्टी के भाग्य, जानें 0 से सीधे 20 सांसदों वाली पार्टी का सफर
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TMC के बागी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर NCPI में मर्जर की अनुमति मांगी।
नेशनल डेस्क. TMC के 20 सांसदों की बगावत के बीच अचानक नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी (NCPI) चर्चा में आ गई। दरअसल, TMC के बागी सांसदों ने रविवार को NCPI में विलय का ऐलान किया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की। वहीं TMC संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला से अपील की कि अलग गुट को कोई मान्यता न दें।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC को मिली हार के पार्टी टूट के बुरे दौर से गुजर रही है। 20 बागी सांसदों ने लोकसभा में NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है। अगर लोकसभा स्पीकर इस मर्जर को स्वीकार करते हैं तो अचानक चर्चा में आई NCPI लोकसभा में बीजेपी, कांग्रेस और सपा के बाद चौथी सबसे बड़ी पार्टी होगी। जबकि NDA में दूसरी बड़ी पार्टी होगी। इसके बाद TDP के 16 और JDU के 12 सांसद हैं।

NCPI बंगाल में रजिस्टर्ड, त्रिपुरा में लड़ा चुनाव
NCPI को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से पहले 20 जनवरी 2023 को चुनाव आयोग में गैर-मान्यता प्राप्त दल के तौर पर रजिस्टर्ड कराया गया था। यानी- पार्टी या तो नई है या नेशनल या स्टेट पार्टी के तौर पर मान्यता के लिए उसे चुनाव में पर्याप्त वोट या सीटें नहीं मिलीं।
इस पार्टी का दफ्तर हावड़ा में है। चुनाव आयोग के मुताबिक, पार्टी की अध्यक्ष शेउली कुंडू हैं, जो कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत करती हैं। बंगाल में रजिस्टर्ड NCPI ने त्रिपुरा में सिर्फ दो सीटों पर चुनाव भी लड़ा था। हालांकि दोनों सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी को दोनों सीटों पर मिलाकर 1000 वोट भी नहीं मिले। पार्टी का चुनाव चिन्ह '7 किरणों के साथ पेन निब' था। इस पार्टी को रजिस्टर्ड कराने वाले लोगों की लॉ फर्म, बंगाली अखबार और NGO भी हैं।
'सत्ता स्थायी नहीं होती'
उत्तिया कुंडू NCPI की उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने 13 मई को अपने फेसबुक पेज पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक फोटो शेयर की। इसमें उन्होंने बंगाली में कैप्शन में लिखा था- सिर्फ सपने देखने के दिन खत्म हो गए हैं, अब उन सपनों को हकीकत में बदलने का समय है। सुवेंदु अधिकारी का बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में विजय का सफर शुभ हो।
वहीं, कुंडू ने 10 जून को यानी मर्जर से 4 दिन पहले एक और पोस्ट में लिखा। इसमें उन्होंने ममता और अभिषेक बनर्जी की फोटो शेयर की और लिखा- अहंकार पतन का कारण है। सत्ता में लोग अक्सर भूल जाते हैं कि सत्ता स्थायी नहीं होती, और जनता का समर्थन ही असली ताकत है। जो आज शीर्ष पर हैं, उन्हें कल समय को जवाब देना होगा।
NCPI में विलय क्यों
बागी सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ) से बचने के लिए विलय का रास्ता चुना है। यह कानून किसी पार्टी के भीतर टूट को मान्यता नहीं देता, बल्कि तब विलय की अनुमति देता है जब पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं।
बागी सांसदों का दावा है कि TMC के 28 में से 20 सांसद इस विलय के समर्थन में हैं। कानून के तहत जरूरी दो-तिहाई बहुमत से अधिक है। बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की भी मांग की है। कुछ बागी नेता भविष्य में TMC के नाम और चिन्ह पर अपना दावा जताने के पक्ष में हैं। मानसून सत्र से पहले NCPI में विलय को कानूनी तौर पर ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।

इससे पहले 2016 में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 43 विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) में शामिल हो गए और BJP के नेतृत्व वाले उत्तर पूर्व लोकतांत्रिक गठबंधन (ळआअओ) का हिस्सा बन गई थी। इसके बाद उसी साल दिसंबर में खांडू PPA के 32 विधायकों के साथ आधिकारिक तौर पर BJP में शामिल हो गए।
बागियों ने क्या कहा?
स्पीकर से मुलाकात के बाद काकोली घोष ने कहा- हमने लोकसभा सचिवालय को अपने फैसले की औपचारिक सूचना दे दी है। उन्होंने कहा- हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करेंगे और एनडीए का समर्थन करेंगे।

वहीं, सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी पुष्टि की कि बागी खेमे का NCPI में विलय हो गया है। उन्होंने कहा- हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहे हैं। हम राष्ट्र के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एनडीए के साथ सहयोग करेंगे।

ममता बनर्जी गुट ने क्या कहा
ममता बनर्जी खेमे ने बागी सांसदों के दावों को चुनौती दी है और विलय को राजनीतिक और कानूनी रूप से गलत बताया है। TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा- जिस पार्टी के चुनाव चिन्ह पर आप चुने गए थे, उसी के साथ विश्वासघात करने के बाद आप अपने वोटर्स के सामने कैसे जाएंगे? यह विलय मजाक है। NCPI को कौन जानता है? क्या वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर लोगों को बता सकते हैं कि वे अब NCPI का हिस्सा हैं?

