महाराष्ट्र गवर्नर सीपी राधाकृष्णन NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार: मां ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन से इंस्पायर होकर रखा नाम; जीतना लगभग तय
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सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में PM मोदी से मुलाकात की।
NDA ने महाराष्ट्र के गवर्नर सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। 17 अगस्त को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हुए तस्वीर पोस्ट की। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर को वोटिंग होगी। उसी दिन काउंटिंग भी होगी। राधाकृष्णन 21 अगस्त को नॉमिनेशन फाइल करेंगे।
उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के सांसद भाग लेते हैं, इसलिए 9 सितंबर को होने वाले इलेक्शन में सीपी राधाकृष्णन का जीतना लगभग तय है। NDA के पास इतने सांसद हैं कि राधाकृष्णन आराम से चुनाव जीत सकते हैं।
अगर वे चुने जाते हैं तो सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बाद इसी सरनेम के दूसरे उपराष्ट्रपति होंगे। इंटरस्टिंग फैक्ट ये भी है कि सीपी राधाकृष्णन का नाम उनकी मां ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन से इंस्पायर होकर ही रखा था।
राधाकृष्णन का जीतना तय क्यों
राष्ट्रपति की तरह उपराष्ट्रपति चुनाव में भी जनता भाग नहीं लेती। दोनों सदनों में जिसके पास ज्यादा सांसद होंगे, उपराष्ट्रपति उसी दल या साइड का व्यक्ति बनता है। फिलहाल, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में मिलाकर टोटल सीटें 788 हैं। इसमें 6 सीटें खाली हैं।
इस तरह टोटल 782 सांसद इस वक्त दोनों सदनों में मिलाकर हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए 391 सांसदों यानी 50% के समर्थन की जरूरत होगी। बीजेपी की अगुवाई वाली NDA के पास 422 सांसद हैं, जो कि बहुमत से ज्यादा ही हैं। इसलिए राधाकृष्णन का जीतना लगभग तय है।

RSS बैकग्राउंड, तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष भी रहे
सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले से हैं। उनका जन्म 20 अक्टूबर 1957 को हुआ था। 16 साल की उम्र में ही RSS से जुड़ गए थे। इसके बाद बीजेपी जॉइन कर लिया। 1998 और 1999 में तमिलनाडु की कोयंबटूर सीट से सांसद बने।
राधाकृष्णन 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। फिर 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने। इसके बाद जुलाई 2024 में महाराष्ट्र के गर्वनर बने। उन्होंने कुछ समय के लिए अन्य राज्यों में भी राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभाला।
तमिलनाडु से ही क्यों चुना गया उम्मीदवार
तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राधाकृष्णन के नाम की घोषणा का एक मतलब ये भी निकाला जा रहा है कि बीजेपी इसके जरिए तमिलनाडु में अपनी स्थिति बेहतर करना चाहती है। उपराष्ट्रपति पद के लिए तमिलनाडु के व्यक्ति को चुनकर बीजेपी वहां के लोगों को एक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने सभी को चौंकाया
दरअसल, जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया। उनके इस फैसले ने सभी को चौंका दिया था। इसके बाद से चर्चा हो रही थी कि अब इस पद के लिए बीजेपी किसका नाम आगे बढ़ाएगी।

