महिलाओं के लिए मुंबई सबसे सेफ शहरों में एक: दिल्ली, पटना और कोलकाता अनसेफ; रिपोर्ट में दावा- 3 में से सिर्फ 1 महिला करती हैं हैरेसमेंट की शिकायत
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राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने कहा- सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं
नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (NARI 2025) ने बड़े शहरों में महिला सुरक्षा पर चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 40% महिलाएं शहरी इलाकों में खुद को असुरक्षित मानती हैं। सर्वे से पता चला कि हैरेसमेंट की घटनाओं में से सिर्फ तीन में से एक महिला ही पुलिस या अपनी संस्था से शिकायत करती हैं।
महिला सुरक्षा इंडेक्स में मुंबई, कोहिमा, भुवनेश्वर और विशाखापटनम को सबसे सुरक्षित शहरों में गिना गया। यानी इन शहराें में महिलाएं खुद को सबसे ज्यादा सेफ महसूस करती हैं। वहीं, दिल्ली, पटना, कोलकाता, रांची और श्रीनगर महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों में शामिल हैं।
जिन शहरों में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, वहां बेहतर जेंडर इक्वालिटी है। पुलिस की सक्रियता और इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छी है। दिल्ली, पटना, कोलकाता, रांची और श्रीनगर में महिलाएं पब्लिक प्लेसेज पर असुरक्षित महसूस करती हैं। इन शहरों की महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से भी हिचकती हैं।
देश के 31 शहरों 12,770 महिलाओं पर सर्वे
रिपोर्ट को ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडमिशियन (GIA), पीवैल्यू एनालिटिक्स, द नॉर्थ कैप यूनिवर्सिटी और जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल ने मिलकर तैयार किया। इसमें देश के 31 शहरों की 12,770 महिलाओं से बातचीत की गई। सर्वे का मकसद यह समझना था कि महिलाएं शहरी माहौल,वर्कप्लेस और पब्लिक प्लेसेज पर खुद को कितना सुरक्षित महसूस करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, NCRB के आंकड़े से असल तस्वीर सामने नहीं आती क्योंकि ज्यादातर घटनाएं दर्ज नहीं हो पातीं।
कई शहरों में महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करती
इस रिपोर्ट में महिला सुरक्षा को लेकर शहरों को रैंक किया है। इस इंडेक्स में मुंबई, कोहिमा, भुवनेश्वर और विशाखापटनम को सुरक्षित माना है। इन शहरों में मजबूत जेंडर इक्वालिटी, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और इफेक्टिव पुलिस सुरक्षा के आधार पर सुरक्षित माना गया है। इसी तरह रांची, श्रीनगर, कोलकाता,दिल्ली और पटना को महिला सुरक्षा के लिहाज से सबसे नीचे रखा गया है।
86% महिलाएं दिन के उजाले में सुरक्षित महसूस करती है
सर्वे के मुताबिक, 86% महिलाएं दिन के समय शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक स्पेस में सुरक्षित महसूस करती हैं। हालांकि, रात होते ही हालात बदल जाते हैं। खासकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और एंटरटेनमेंट सेक्टर में काम करने वाली महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित फील करती हैं। रिपोर्ट का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा रात के समय सुनिश्चित करने में पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। यही वह समय है जब अपराधी गतिविधियों की संभावना ज्यादा होती है।
वर्कप्लेस पर भी सेफ्टी को लेकर कॉन्फिडेंस नहीं महिलाएं
रिपोर्ट में कार्यस्थल की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। सिर्फ चार में से एक महिला को विश्वास है कि उनका अधिकारी उनकी शिकायत पर कार्रवाई करेगा।वहीं, 53% महिलाओं को यह जानकारी ही नहीं थी कि उनके दफ्तर में POSH पॉलिसी (प्रिवेंशन ऑफ सेक्शुअल हैरेसमेंट) मौजूद है या नहीं। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों से अनजान हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्थिति पॉलिसी मेकर्स और समाज दोनों के लिए चुनौती है।
सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने कहा- NARI रिपोर्ट बताती है कि सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है। यह महिलाओं के जीवन के हर पहलू पर असर करती है। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी तो उनकी शिक्षा और रोजगार पर भी असर होगा। रहाटकर ने अपील की कि रिपोर्ट को एक बेंचमार्क मानकर पॉलिसी मेकर्स और सोसाइटी दोनों बदलाव लाएं।

