2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट-1078: महाराष्ट्र ATS ने HC के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी; बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी किया था
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2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके एक दिन बाद ही एटीएस ने इसे फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। (फाइल फोटो)
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (21 जुलाई) को 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। महाराष्ट्र की स्पेशल कोर्ट ने 2015 में इन सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था। अब महाराष्ट्र ATS ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है। 2006 में हुए इन धमाकों में 189 लोगों की मौत हुई थी। हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा था, 'अभियोजन पक्ष (सरकारी पक्ष या प्रॉसीक्यूटर) आरोपियों के खिलाफ मामला साबित करने में नाकाम रहा है।'
19 साल बाद हाईकोर्ट का फैसला, सभी आरोपी बरी
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मामले में 19 साल बाद फैसला आया है। इस हमले ने मुंबई के वेस्टर्न रेलवे के पूरे नेटवर्क को तबाह कर दिया। इन हमलों में 189 लोगों की मौत हुई थी और 820 लोग जख्मी हुए थे। 2015 में मुंबई की विशेष अदालत ने इन सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था और इनमें से 5 को मौत की सजा सुनाई थी।
'आरोपियों ने हमले को अंजाम दिया, यह मानना मुश्किल'
जस्टिस अनिल किलोर और श्याम चंदक की बेंच ने कहा, अभियोजन पक्ष ने जो सबूत पेश किए हैं, वे आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं हैं। कोर्ट ने कहा, यह मानना मुश्किल है कि आरोपियों ने ही इन हमलों को अंजाम दिया। इसलिए इन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। अब इस फैसले के बादमहाराष्ट्र ATS ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
11 जुलाई को हुए थे 7 ब्लास्ट
11 जुलाई 2006 को शाम 6.23 बजे से 6.28 बजे तक पश्चिमी लाइन पर 7 ट्रेनों में विस्फोट हुए थे। ये ब्लास्ट माटुंगा और मीरा रोड रेलवे स्टेशनों के बीच चलती ट्रेनों में हुए थे। इन ब्लास्ट में 189 लोग मारे गए और 829 घायल हुए। ये ब्लास्ट इतने ताकतवर थे कि ट्रेन की छत और कोच चीरते हुए यात्री बाहर गिर गए थे। माहिम और बोरीबली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार यात्रियों के अलावा चर्चगेट की ओर यात्रा करने के लिए प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहे यात्री भी धमाकों की चपेट में आ गए थे।
2015 में ये आरोपी ठहराए गए थे दोषी
30 सितंबर 2015 को महाराष्ट्र की स्पेशल (MCOCA) कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 5 दोषियों कमाल अहमद, मोहम्मद वकील अंसारी, मोहम्मद फैसल रहमान, कुतबुद्दीन सिद्दीकी, नवीन हुसैन और आसिफ खान को फांसी की सजा सुनाई थी। 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
एक आरोपी अब्दुल वाहिद को बरी कर दिया था।

