एक मर्डर की माफी मिले तो गोली मार दूंगा: मुकेश सहनी का CEC ज्ञानेश कुमार पर कंट्रोवर्शियल बयान, बोले- चुनाव आयोग BJP के लिए काम कर रहा
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मुकेश सहनी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के फाउंडर और नेशनल प्रेसिडेंट है। बिहार में इस दल का कुछ इलाकों में अच्छा प्रभाव है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में यह पार्टी कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर लड़ी थी।
नेशनल डेस्क। चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी नेताओं के तेवर आक्रामक नजर आ रहे हैं। तमाम विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ हुए हैं। इस बीच विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के चीफ मुकेश सहनी ने एक कंट्रोवर्शियल स्टेटमेंट दिया है। उन्होंने यह कह दिया है कि अगर उन्हें एक हत्या की माफी मिल जाए तो वे CEC को गोली मार देंगे। सहनी ने अपने बयान के सपोर्ट में यह भी कहा कि उनके पूर्वजों ने भी देश की आजादी के लिए ऐसा रास्ता अपनाया था।
सहनी का यह बयान 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें चुनाव आयोग के अंदर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति जताई थी। इन आपत्तियों में दावा किया गया कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।
सहनी ने और क्या-क्या कहा?
ANI से बातचीत में सहनी ने इस खुलासे के आधार पर चुनाव आयोग और केन्द्र की मोदी सरकार पर निशाने साधे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग देश में लोकतंत्र की हत्या कर रहा है और BJP के लिए काम कर रहा है।
उन्होंने कहा- हमारे लोकतंत्र में जनता को मालिक बनाया गया। ऐसा इसलिए ताकि सरकार काम न करे तो सत्ता को पलट दो, कुर्सी से उतार दो। लेकिन हो क्या रहा है? चुनाव में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं, ED-CBI के जरिए चुनाव जीता जा रहा है, वोटर लिस्ट से लोगों के नाम काटकर चुनाव जीता जा रहा है। इस चुनाव आयोग के कारण हमारे देश में लोकतंत्र नहीं बचा। अब इसे राजतंत्र घोषित कर देना चाहिए। जब पहले से विजेता तय है तो चुनाव में बेवजह लाखों करोड़ों खर्च क्यों किए जा रहे हैं।
सहनी ने कहा कि बिहार में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं। किसी के पास घर नहीं है, किसी के पास खाने के लिए रोटी नहीं है और ये लोग मोदी जी का बड्डे मना रहे हैं। करोड़ों रुपए खर्च कर लाखों दिए जला रहे हैं। गरीब परेशान हो रहा है और ये लोग सत्ता का मजा ले रहे हैं। गरीब करे भी तो क्या करे, वो वोट इनके खिलाफ देना भी चाहे तो चुनाव आयोग इनके सपोर्ट में खड़ा हो जाता है।
रिपोर्ट में ऐसा क्या जिस पर घिर गए ज्ञानेश कुमार?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी की आपत्तियां वोटर लिस्ट से जुड़े कई अहम मामलों पर थीं। इनमें नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, वोटर के नाम हटाने, वोटर डेटा संभालने वाले सॉफ्टवेयर और पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपील शामिल थीं। इन आपत्तियों की लिखित कॉपी CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी। रिपोर्ट की कुछ खास बातें...
- नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए Form 6 में SIR से जुड़े सवाल जोड़े गए। नए आवेदकों से पूछा गया कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में था या नहीं। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि Form 6 चुनाव नियमों के तहत तय है और इसमें इस तरह का बदलाव नियम बदले बिना नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी जोशी की शिकायत को सपोर्ट किया। संधू ने इसे अनअथॉराइज्ड और अवैध बताते हुए हटाने की बात कही थी।
- विवेक जोशी ने वोटर डेटा के धीरे-धीरे दिल्ली में सेंट्रलाइज्ड होने पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव कानून के तहत अधिकार प्राप्त अधिकारी ही करें और इसके लिए ऑडिट भी किया जाए।
- संधू ने भी इलेक्टोरल रोल से जुड़े काम के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर 'ERONet' तक राज्य के अधिकारियों की पहुंच न होने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि कई राज्यों के चुनाव अधिकारियों के पास सिस्टम का प्रॉपर और कम्पलीट एक्सेस नहीं है।
- संधू और जोशी ने चुनाव आयोग के IT सिस्टम में किए जा रहे बदलावों को लेकर कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को भी पत्र लिखा था। दोनों को आशंका थी कि इन बदलावों से वोटर लिस्ट से जुड़े सिस्टम की मॉनिटरिंग और कंट्रोल में बदलाव हो सकता है।
- संधू ने सवाल उठाया था कि पश्चिम बंगाल में ज्यूडिशियल जांच के बाद जिन वोटर के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखे गए थे, उन्हें हटाने की अपील किसने और किस अधिकार के तहत दाखिल कीं।
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ECI ने रिपोर्ट के दावों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट को लेकर सफाई दी है कि आयोग के सदस्यों के बीच लिखित सवाल, सुझाव और आपत्तियां काम करने की सामान्य इंटरनल प्रोसेस का हिस्सा हैं। इसे मतभेद के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं।
विपक्ष का क्या कहना है?
कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना(UBT) और आम आदमी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग और केन्द्र की मोदी सरकार को घेरा है। सभी पार्टियों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार को CEC पद से हटाने की मांग की है। इन दलों ने इस खुलासे को अपने 'वोट चोरी' और 'SIR' के खिलाफ अभियान से जोड़ते हुए पेश किया और कहा कि वे कई सालों से चुनावों में हो रही धांधली की शिकायत कर रहे थे और अब इस रिपोर्ट से साबित हो गया कि चुनाव आयोग केन्द्र की मोदी सरकार के दबाव में काम कर रहा है और BJP को हर जगह चुनाव में जीत दिला रहा है।
विपक्ष अब इस मुद्दे को संसद में लाने की भी तैयारी कर रहा है। खबर है कि विपक्षी दल दो हफ्तों के अंदर दोनों सदनों में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने वाले हैं। रिपोर्ट में कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि कांग्रेस ने ही इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को अप्रोच किया था।

