जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव: सत्ता पक्ष और विपक्षी दल साथ आए, लोकसभा में 145 और राज्यसभा में 63 सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए
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जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर बड़ी मात्रा में कैश मिला था।
संसद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ 145 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को प्रस्ताव सौंप दिया है।
राज्यसभा में भी जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए समिति गठन को पत्र दिया गया है। राज्यसभा चेयरमैन धनखड़ को 63 सांसदों ने जस्टिस यशवंत के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव सौंपा है।
अनुराग ठाकुर और राहुल गांधी ने किए साइन
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियां जैसे TDP (तेलगू देशम पार्टी), JDU और NDA में शामिल पार्टियों ने साइन किए हैं। इसके अलावा विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (M) ने साइन किए हैं। अब तक साइन करने वाले सांसदों में बीजेपी से पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, NCP (शरद पवार) की तरफ से सुप्रिया सुले का नाम शामिल है।
जज को पद से हटाने वाला प्रस्ताव मिला
राज्यसभा चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग वाला एक प्रस्ताव मिला है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट जज को पद से हटाने के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा सांसदों का नोटिस मिला है। राज्यसभा चेयरमैन ने कहा कि अगर दोनों सदन में एक ही दिन मोशन आता है तो यह सदन की प्रापर्टी हो जाता है।
सूत्रों ने बताया कि भारत में पहली बार किसी उच्च न्यायालय के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की जांच संविधान के आर्टिकल 124, 217 और 218 के तहत संसद में की जाएगी।
क्या है मामला
14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। जहां कथित तौर पर आग से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने खुद जले हुए नोटों का वीडियो सार्वजनिक किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने एक 3 सदस्यीय जांच पैनल बनाया। बाद नें उन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया था।
जानिए हाईकोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया।
- हाईकोर्ट के जज को हटाने और उस पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के आर्टिकल 124 (4) में दी गई है। जज जांच अधिनियम, 1968 के तहत संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरुरी है।
- प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत करने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति एक 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाते हैं। कमेटी में CJI, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्यायविद होते हैं। यह कमेटी ही आरोप तय करती है। अगर जज दोषी होते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
- महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। दोनों सदन में महाभियोग प्रस्ताव पास होने पर राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

