गरीब महिलाओं के अंडाणु बेचने वाले गिरफ्तार: हैदराबाद में मां-बेटे ने लाखों कमाए; आरोपी महिला खुद भी सरोगेट मदर
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ये एक AI जेनरेटेड तस्वीर है। इसे खबर के नेचर को देखते हुए तैयार किया गया है।
हैदराबाद पुलिस ने ह्यूमन एग्स और अवैध सरोगेसी का रैकेट चलाने वाले मां-बेटे को गिरफ्तार किया है। इसमें शहर के कई फर्टिलिटी सेंटर भी शामिल हैं। एक 45 साल की महिला 27 वर्षीय बेटे के साथ मिलकर इस रैकेट को ऑपरेट करती थी। ये दोनों आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को बहला-फुसलाकर उनके एग्स निकलवा लेते थे। फिर उन्हें बेचते थे।
कुछ महिलाओं को तो सरोगेसी के लिए भी तैयार कराते थे। इसके बाद बच्चे की चाहत रखने वाले निसंतान यानी इन्फर्टाइल कपल्स के साथ डील करके लाखों कमाते थे।
महिलाओं के एग्स ऊंचे दामों पर बेचे जाते थे
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि आरोपी मां-बेटे उन महिलाओं को ढूंढते थे, जो तंगी की शिकार रहती थीं। इन महिलाओं को एग्स यानी अंडाणु देने के लिए तैयार किया जाता था। फिर इन्हें शहर के किसी फर्टिलिटी सेंटर भेज दिया जाता था। वहां मेडिकल प्रॉसिजर के बाद उनके अंडे निकाल लिए जाते थे। फिर उन्हें फ्रीज करके जरूरतमंद कपल्स को ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।
अब सवाल यह है कि इन एग्स को खरीदता कौन होगा। जाहिर है कि कुछ महिलाओं में एग्स डेवलप ही नहीं हो पाते, जिसकी वजह से उनका मां बनना नामुमकिन हो जाता है।
आरोपी महिला खुद भी सरोगेट मदर रह चुकी
जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला खुद भी सरोगेट मदर और एग डोनर रह चुकी है। उसने अपने अनुभव का गलत इस्तेमाल करते हुए इसका धंधा ही शुरू कर दिया। फिलहाल, मां-बेटे गिरफ्तार हो चुके हैं।
इसके अलावा, पुलिस ने 6 एग्स डोनर और सरोगेट मदर्स को नोटिस भेजा है। पुलिस ने कहा कि जब इन्हें पता था कि भारत में कॉमर्शियल सरोगेसी अपराध है, तो ये महिलाएं ऐसा करने के लिए राजी क्यों हुईं। रडार में आए फर्टिलिटी सेंटर्स और क्लिनिक से जुड़े डॉक्टर्स और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
एग्स डोनेट और सरोगेसी वाली प्रक्रिया समझ लीजिए
महिलाओं में हर महीने अंडाणु यानी एग्स बनते हैं। यही अंडाणु फर्टिलाइजेशन के बाद बच्चे के रूप में विकसित होते हैं। सबसे पहले महिलाओं को इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि ज्यादा एग्स बन सकें। इसके बाद उन्हें छोटे से मेडिकल प्रोसिजर के जरिए बाहर निकाल लिया जाता है।
एग्स निकालने के बाद उन्हें तुरंत लैब में फ्रीजिंग प्रॉसेस के जरिए लॉन्ग टर्म प्रिजर्वमेंट में रख दिया जाता है। इसका मकसद ये है कि इनका आगे इस्तेमाल किया जा सके। जैसे ही जरूरतमंद कपल या कस्टमर मिलता, तो उससे डील के बाद उसे ये प्रिजर्व्ड एग्स बेच दिए जाते हैं। मेडिकल प्रॉसीजर के जरिए इनफर्टाइल महिला की ओवेरी में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। इसके बाद स्पेशलिस्ट डॉक्टर की निगरानी में उसका डिलीवरी टाइम निकाला जाता है।
फ्रीज किए एग्स को शुक्राणु यानी स्पर्म के साथ फर्टिलाइज करके भ्रूण बनाया जाता है। इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में दाखिल कराया जाता है। इसमें बच्चा असली मां-बाप का ही होता है, बस कोख किसी और की होती है। इसी को किराए की कोख को सरोगेसी कहते हैं। ऐसे कपल्स जो नैचुरली बच्चे पैदा करने में किसी वजह से सक्षम नहीं होते, वो इस मेथड का सहारा लेते हैं।
शाहरुख के सबसे छोटे अबराम और आमिर के बेटे आजाद सरोगेसी से ही हुए थे। कानूनी तौर पर सरोगेट मदर की पहचान रिवील नहीं की जा सकती। 9 महीने बच्चे को कोख में पालने वाली महिला कपल्स से तय रकम लेती है।

