मानसून सत्र 'वॉशआउट' के करीब: 16 दिन हंगामा, परिसीमन-FCRA बिल पर चर्चा तक नहीं हो पाई; अब आखिरी 3 दिन क्या होगा
Published:
6 min read

20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में हर दिन इस तरह की तस्वीरें नजर आई हैं। यह सत्र 13 अगस्त तक चलना है यानी अब सत्र खत्म होने में 3 दिन बाकी हैं। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। संसद के मानसून सत्र के अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सदन चले तो कैसे चले? NEET पेपर लीक और स्टूडेंट पर पुलिस एक्शन को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार जारी है। 22 दिनों में संसद की 16 बैठकों के दौरान कोई खास काम नहीं हो सका। महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA संशोधन जैसे बड़े बिलों पर तो चर्चा तक नहीं हो पाई।
सोमवार (10 अगस्त) को भी यही हाल रहा। सरकार को यह अंदाजा पहले से था, इसलिए सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में भी बड़े बिलों को जगह नहीं मिली। यानी सरकार भी समझ रही है कि वर्तमान हालात में वह अपने बड़े विधायी एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा सकती। यह हाल तब है जब विपक्षी दलों में कुछ पार्टियां महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार से बातचीत के लिए तैयार दिख रही हैं और सत्ता पक्ष के खेमे में सांसदों की संख्या भी बढ़ गई है।

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का रास्ता ब्लॉक
सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को आगे बढ़ाना चाहती है। इस प्रस्ताव में 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की बात है।
इसी बिल को अप्रैल में संसद में बड़ा झटका लग चुका है। तब इसे जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे।
सरकार के पास लोकसभा में अब 27 सांसद बढ़ गए हैं। इसके अलावा DMK और NCP (शरद गुट) जैसी विपक्षी पार्टियां भी परिसीमन के खिलाफ अपना रुख नरम कर चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद संविधान संशोधन के लिए जरूरी 360 वोट से सरकार काफी पीछे है।
केन्द्र सरकार इसके बावजूद बिल पर चर्चा के जरिए माहौल बना सकती थी लेकिन विपक्ष के आक्रामक रुख और देशभर में हालिया CJP प्रोटेस्ट के बाद सरकार यह जोखिम नहीं लेना चाहती।
FCRA बिल पर कांग्रेस का सीधा विरोध
विदेशी फंड पाने वाले संगठनों पर निगरानी बढ़ाने वाला FCRA संशोधन बिल 2026 भी सरकार के एजेंडे में है। यह बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन अब तक इस पर चर्चा और वोटिंग नहीं हुई है।
मानसून सत्र में इसे पारित करने की कोशिश थी लेकिन पूरी प्लानिंग धरी की धरी रह गई। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार अगले दो-तीन दिनों में इस बिल को लाकर पास कराने की कोशिश करती है तो विपक्ष चुप नहीं बैठेगा। वेणुगोपाल का आरोप है कि बिल अल्पसंख्यकों और NGO को निशाना बनाता है।

रिजिजू ने राहुल से दो बार की मुलाकात, फिर भी बात नहीं बनी
मानसून सत्र के दौरान सरकार ने संसद में गतिरोध खत्म करने की कई बार कोशिश की। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की। दोनों के बीच फोन पर भी बातचीत हुई। शनिवार (8 अगस्त) को दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर भी महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर बयानबाजी हुई।
सरकार दूसरे विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। समाजवादी पार्टी और DMK नेताओं से भी बातचीत की गई है। लेकिन बात बनते नहीं दिख रही। शिरोमणि अकाली दल ने जरूर इस पर समर्थन देने का ऐलान किया है, लेकिन इस दल के पास लोकसभा में महज एक सांसद है।
सुप्रिया सुले ने FCRA पर JPC की मांग की
NCP(SP) सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर अभी कोई अंतिम फैसला बताने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के साथियों से चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। हालांकि वह FCRA बिल के विरोध में हैं। सुले ने कहा कि विदेशी फंड को हमेशा शक की नजर से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने सरकार से बिल वापस लेने या इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेजने की मांग की।
मानसून सत्र के ‘वॉशआउट’ का खतरा
संसद में मौजूदा हंगामे की शुरुआत NEET पेपर लीक और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मुद्दों लेकर हुई थी। बाद में विपक्ष ने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठा दिया।
विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से पुलिस कार्रवाई पर बयान देने की मांग कर रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री की मौजूदगी में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग भी की जा रही है।
20 जुलाई से अब तक हर दिन संसद के अंदर और बाहर विपक्षी पार्टियों का प्रोटेस्ट नजर आया है। पूरे सत्र में अगर कोई एक बड़ा काम हुआ तो वह पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए बिल को सदन में पारित कराना रहा।

आखिरी तीन दिन क्या?
संसद में बीते तीन हफ्तों की तरह ही इस हफ्ते भी हंगामा होते रहने के आसार हैं। हालांकि सरकार चाहेगी कि किसी तरह वह तीन अहम बिलों पर अपनी गाड़ी आगे बढ़ाए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को 2023 के शीतकालीन सत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि तब 146 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर कई अहम कानून पास कर दिए गए थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने देंगे।
संसद के बचे तीन अहम दिनों को देखते हुए कांग्रेस ने शुक्रवार (7 अगस्त) को दोनों सदनों के सांसदों को व्हिप भी जारी किया। सांसदों से 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में मौजूद रहने को कहा गया है।
पार्टी ने अपने INDIA ब्लॉक के सहयोगियों से भी कहा है कि उनके सांसद इन तीनों दिनों सदन में मौजूद रहें। यानी विपक्ष भी साफ संकेत दे चुका है कि वह किसी भी सूरत में सरकार की मंशा को पूरा नहीं होने देगा।
यह भी पढ़ें...

