हर जगह मंदिर और शिवलिंग ढूंढने की जरूरत नहीं: RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- काशी-मथुरा मंदिर आंदोलन में शामिल नहीं होगा संघ
Published:
3 min read

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- तीन बच्चों वाले परिवारों में कोई समस्या नहीं आती
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ काशी-मथुरा के मंदिरों को वापिस हासिल लेने के आंदोलन में हिस्सा नहीं लेगा। हालांकि, कोई भी स्वयंसेवक ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा- हर जगह मंदिर और शिवलिंग ढूंढ़ने की जरूरत नहीं है। भागवत ने दिल्ली के विज्ञान भवन में चल रहे RSS के शताब्दी समारोह के अंतिम दिन यह बात कही।
अपनी मर्जी से काशी-मथुरा आंदोलनों से जुड़ सकते हैं स्वयंसेवक
भागवत ने कहा- राम मंदिर एक मात्र आंदोलन है जिसका RSS ने सीधे तौर पर समर्थन किया था। काशी-मथुरा में मंदिरों को हासिल करने के किसी भी आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिस्सा नहीं लेगा। लेकिन स्वयंसेवक अपनी मर्जी से ऐसे आंदोलनों का हिस्सा बन सकते हैं। काशी, मथुरा और अयोध्या हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण है। अगर कोई अनुरोध करता है तो स्वयंसेवक उसमें हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए हमारी ओर से कोई पाबंदी नहीं होगी।
तीन बच्चे पैदा करने में समस्या नहीं- भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा- डॉक्टरों ने मुझे बताया है कि सही उम्र में शादी करने और तीन बच्चे पैदा करने से माता-पिता और बच्चे सभी स्वस्थ रहते हैं। भविष्य में पारिवारिक जीवन में कोई समस्या नहीं आती। हमारे देश की जनसंख्या 2.1 बर्थ रेट की सिफारिश करती है। यह औसत के तौर पर ठीक है, लेकिन आप कभी भी 0.1 बच्चा पैदा नहीं कर सकते। मैथ में 2.1- 2 हो जाता है, लेकिन जब जन्म की बात आती है, तो दो के बाद, यह तीन होना चाहिए।
मोहन भागवत के संबोधन की बड़ी बातें
- अंग्रेजों ने भारत पर अपना एजुकेशन सिस्टम थोपा। इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली खत्म हो गई। छात्रों को अपने अतीत के बारे में जरूर पढ़ना चाहिए।
- शिक्षा का मतलब सिर्फ रटना नहीं है। बच्चों को संस्कारवान भी बनाना चाहिए। स्टूडेंट्स को हमारे मूल्यों और संस्कारों को जरूर बताना चाहिए।
- संघ तकनीक और आधुनिकता शिक्षा के विरोधी नहीं है। नई शिक्षा नीति का कदम सही दिशा में है। इसमें पंचकोसीय शिक्षा का प्रावधान है।
- हमें अंग्रेज बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, लेकिन अंग्रेजी सीखने में दिक्कत नहीं है। जब मैं 8वीं कक्षा में था, तब मेरे पिता ने ओलिवर ट्विस्ट को पढ़ने को कहा, लेकिन ओलिवर को पढ़ने के लिए प्रेमचंद को छोड़ना भी अच्छा नहीं है।
- आरएसएस एक स्वतंत्र, स्वायत्त संगठन है। हमारा हर सरकार के साथ अच्छा समन्वय है, सिर्फ इस सरकार के साथ नहीं। कहीं कोई झगड़ा नहीं है।यह सच नहीं है कि RSS बीजेपी के फैसले लेता है।

