संसद को बातचीत का पूरा ब्यौरा दो: मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर कार्ति चिदंबरम की मांग, बोले- बताओ क्या बात हुई और आगे क्या होगा
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भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन हुआ। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस बातचीत का पूरा ब्यौरा सामने रखने की मांग की है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन दोनों देशों के पास बातचीत जारी रखने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश और संसद को बताना चाहिए कि दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई, क्या नतीजा निकला और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि भारत को चीन के साथ लगातार बातचीत करते रहना चाहिए। दोनों देशों के बीच बॉर्डर, सिक्योरिटी और बिजनेस से जुड़े कई मुद्दे हैं। इनमें से सभी का हल एक ही बैठक में नहीं निकलेगा, लेकिन बातचीत बंद करने से भी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।

‘सरकार बताए दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई?’
मोदी और शी की बैठक को लेकर कांग्रेस सांसद ने सरकार से ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सिर्फ बैठक होने की जानकारी देना काफी नहीं है। देश को यह भी पता चलना चाहिए कि किन मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे क्या किया जाना है।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार को संसद और जनता को बताना चाहिए कि बैठक में क्या मुद्दे उठाए गए, क्या भरोसा दिलाया गया और किस बात पर आगे काम किया जाएगा।
उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसी बैठकों में सरकार अक्सर असल बातचीत और नतीजों की जगह तस्वीरों और दिखावे पर ज्यादा ध्यान देती है। इसलिए यह सवाल पूछना जरूरी है कि बैठक का नतीजा क्या रहा और उसका फॉलोअप क्या होगा।

‘BRICS में आतंकवाद की निंदा, लेकिन असर दिखना चाहिए’
कार्ति चिदंबरम ने BRICS के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद की निंदा किए जाने का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ बयान देने से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि सदस्य देश आगे क्या करते हैं।
कार्ति चिदंबरम ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा किए जाने का भी स्वागत किया। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई देश आतंकवाद की निंदा करता है और दूसरी तरफ पाकिस्तान को किसी संघर्ष में मदद भी करता है, तो ऐसे बयान की वास्तविक अहमियत कितनी रह जाती है?
उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी। ऐसे में उन्होंने कहा कि BRICS के बयान की असली परीक्षा यह होगी कि क्या सदस्य देशों के रवैये में कोई बदलाव आता है या नहीं।
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