मोदी-ट्रम्प मिलकर मसला सुलझा लेंगे: रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ का मामला, पीटर नवारो ने कहा- हालात बदले हैं, बातचीत से हल निकल आएगा
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तस्वीर जून 2026 की है। फ्रांस में हुई G-7 समिट में PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई थी।
नेशनल डेस्क। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काउंसलर पीटर नवारो का एक बयान आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बहुत अच्छे रिश्ते हैं और रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का मुद्दा दोनों नेता आपस में सुलझा लेंगे।
नवारो ने यह बात न्यूज एजेंसी ANI के एक सवाल के जवाब में कही। उनका बयान ऐसे वक्त में आया है, जब अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने के डायरेक्शन में एक बड़ा कदम उठाया है।
‘ट्रंप और मोदी खुद इस मुद्दे को सुलझा लेंगे’
नवारो ने कहा- रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के पहले रूस के साथ तेल कारोबार में भारत इस तरह शामिल नहीं था, जिस तरह युद्ध शुरू होने के बाद हुआ। जंग छिड़ने के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना शुरू किया और उसके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को अपना नाम देकर बेचना भी शुरू कर दिया। इससे यूक्रेन के खिलाफ रूस की वॉर मशीन को मदद मिली।
नवारो ने बताया कि अब यह मामला सुलझ गया है। अब भारत ऐसा नहीं कर रहा है। ऐसे में आपके प्रधानमंत्री और हमारे राष्ट्रपति इस मुद्दे को आसानी से सुलझा सकते हैं। इस मामले में अब मेरे या किसी और के बीच में आने की जरूरत नहीं है
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नवारो ने भारत में ऑनलाइन विरोध का भी जिक्र किया
नवारो ने बताया कि करीब 6-8 महीने पहले उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स में एक आर्टिकल लिखा था, जिसमें उन्होंने भारत और रूस के तेल कारोबार को लेकर अपनी बात रखी थी।
उन्होंने कहा कि इस लेख के बाद इंटरनेट पर भारतीयों की ओर से उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा। नवारो ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें भारतीय इंटरनेट यूजर्स की तरफ से ‘फायरबॉम्ब’ किया गया।
क्या है 100% टैरिफ वाला मामला?
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की कार्रवाई का खतरा अब काफी गंभीर हो गया है। 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पास किया, जिसके तहत राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं।
इस प्रस्ताव में भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार देशों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने से मॉस्को की अर्थव्यवस्था को पैसा मिलता है और इससे यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई को फंड करने में मदद मिलती है।
हालांकि, सीनेट से बिल पास होना अपने आप में यह नहीं बताता कि भारत पर 100% टैरिफ तुरंत लागू हो गया है। इसके लिए आगे की प्रोसेस और राष्ट्रपति के फैसले की जरूरत होगी।
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भारत के लिए क्यों अहम है रूस का तेल?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों के बीच रूस ने भारत को रियायती कीमतों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया। भारत की रिफाइनरियों ने इसका फायदा उठाया और रूस से तेल खरीद काफी बढ़ गई।
भारत का कहना रहा है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें बहुत बड़ी हैं और वह जहां से सस्ता और भरोसेमंद तेल मिलेगा, वहां से खरीद करेगा। भारत यह भी साफ करता रहा है कि उसकी तेल खरीद देश की एनर्जी सिक्योरिटी और उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखकर की जाती है।
ऐसे में अगर अमेरिका 100% तक का टैरिफ लगाता है, तो इसका असर सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार पर नहीं बल्कि भारत की तेल खरीद और दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
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