राहुल या प्रियंका मेरे कौन: इन्हें मेरा नाम-फोटो इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया; विपक्षी सांसदों पर भड़कीं बिहार की मिंता देवी
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विपक्षी सांसदों ने मिंता देवी का नाम और फोटो लगी टीशर्ट पहन संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग की लिस्ट में मिंता देवी की उम्र गलत दर्ज थी।
बिहार के सिवान जिले की एक महिला मिंता देवी विपक्षी सांसदों पर भड़क उठीं। दरअसल, प्रियंका गांधी समेत कुछ विपक्षी सांसदों ने मिंता देवी के नाम की टीशर्ट पहन कथित वोट फ्रॉड को लेकर प्रोटेस्ट किया। मामला यह है कि वोटर लिस्ट में मिंता देवी की उम्र 124 साल लिखकर आ गई।
विपक्ष ने मौके को भुनाते हुए मिंता देवी की फोटो लगी टीशर्ट पहन EC के खिलाफ प्रदर्शन किया। जब यह बात मिंता देवी को पता चली कि तो वो भड़क गईं। उन्होंने कहा कि चाहे वो प्रियंका हों या राहुल गांधी, इन्हें मेरा नाम और फोटो इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया।
आधार कार्ड में जन्म का साल 1990
इलेक्शन कमीशन ने बिहार में वोटर्स की जो लिस्ट जारी की है, उसमें मिंता देवी की उम्र 124 साल दर्ज है। जबकि आधार कार्ड पर जन्मतिथि 15-07-1990 है। विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को संसद परिसर में मिंता देवी के नाम का टी-शर्ट पहन लिया। टी-शर्ट के पीछे 124 नॉट आउट लिखा हुआ था। विपक्ष का यह सिंबोलिक प्रोटेस्ट इलेक्शन कमीशन के खिलाफ था, लेकिन मिंता देवी को यह बात रास नहीं आई।
प्रियंका या राहुल मेरे कौन लगते हैं
मिंता देवी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- इन लोगों का मुझसे क्या रिश्ता है। प्रियंका या राहुल मेरे कौन लगते हैं। इन्हें किसने यह अधिकार दिया कि वे मेरा नाम और फोटो वाली टी-शर्ट पहनें। लिस्ट में कुछ गलतियां हो गई हैं। मेरे पास अभी तक प्रशासन का कोई कॉल नहीं आया। लेकिन, ये लोग क्यों मेरे शुभचिंतक बन रहे हैं? यह सब मुझे पसंद नहीं।
डिटेल्स डालने वाले ने आंखें मूंद ली थी
मिंता देवी ने आगे कहा- मैं बस इतना चाहती हूं कि मेरे डिटेल्स करेक्ट हो जाएं। जिसने भी ये किया है, क्या उनकी आंखें बंद थीं। अगर सरकार की नजर में मेरी उम्र 124 साल है तो मुझे बुजुर्ग पेंशन क्यों नहीं दे देते।
EC के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
विपक्ष संसद में पिछले 2 दिन से वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) और कथित वोट फ्रॉड को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। सोमवार को मंगलवार को विपक्षी सांसद एकजुट हुए और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पूरी खबर पढ़ें..
आखिर SIR है क्या, इसे लेकर इतना विवाद क्यों
दरअसल, 24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का ऐलान किया था। चुनाव आयोग का कहना है कि लगातार पलायन, युवा वोटरों को शामिल करने, मौतों की सूचना न देने, अवैध विदेशी प्रवासियों के शामिल होने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए वोटर लिस्ट रिवीजन जरूरी है। इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गलतियों को सुधारा जा सकेगा।
अब विवाद का विषय यह है कि विपक्ष को लगता है कि इस प्रक्रिया से लाखों लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि नए नियमों के तहत हर मतदाता को दस्तावेज जमा करना जरूरी है, जबकि बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास जरूरी कागजात नहीं हैं। इससे दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष को लगता है कि ये फैसला बिहार चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में लिया गया है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले से सिर्फ बीजेपी और NDA को फायदा होगा। चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि प्रक्रिया पारदर्शी है। सभी को दस्तावेज जमा करने के पर्याप्त मौके मिलेंगे। हालांकि, विपक्ष संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी है। अब मामला कोर्ट में चल रहा है।

