मां के साथ रहना चाहती थी 14 साल की लड़की: अदालत ने भेजा सुधार गृह; फैसले से दुखी नाबालिग ने मद्रास हाईकोर्ट की बिल्डिंग से लगाई छलांग
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प्रतीकात्मक चित्र
14 साल की एक लड़की ने अदालत के फैसले से दुखी होकर मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट की बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर से छलांग लगाकर सुसाइड करने की कोशिश की। कोर्ट ने लड़की को चेन्नई के सरकारी बाल गृह में रखने का आदेश दिया था।
लड़की के माता-पिता का तलाक हो चुका है। पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, इसी पर डिवीजन बेंच ने ये फैसला सुनाया। पिता ने लड़की के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन जब पुलिस ने खोजबीन शुरू की तो वह अपनी दादी के घर पर मिली।
मां के साथ रहना चाहती थी लड़की
जस्टिस एम एस रमेश और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन के सामने पेश लड़की ने कहा कि वह अपने पिता के साथ नहीं रहना चाहती। पिता नीलंकरई में अकेले रहते हैं। लड़की ने कहा, वह अपनी मां के साथ रहना चाहती है, जो अंडमान में रहती हैं। हालांकि, कोर्ट ने गोपनीय काउंसिलिंग रिपोर्ट के आधार पर कहा कि अंडमान लड़की की भलाई के लिए सुरक्षित और स्थिर नहीं है।
कोर्ट ने सुधार गृह भेजा
कोर्ट ने कहा, 'लड़की ने कहा है कि वह अपने पिता के साथ नहीं रहना चाहती, इसलिए हमारे पास एकमात्र विकल्प यह है कि उसे सुरक्षा गृह में रखने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने पुलिस से लड़की को चेन्नई के सरकारी बाल गृह में छोड़ने के लिए कहा। इतना ही नहीं कोर्ट ने पिता से कहा कि वे लड़की की किलपौक इंस्टीट्यूट मेंटल हेल्थ में काउंसलिंग के दौरान साथ रहें। कोर्ट ने पिता से भी काउंसलिंग कराने के लिए कहा, क्योंकि वे काफी समय से अपनी बेटी से इमोशनली दूर हैं। कोर्ट ने लड़की की मां और दादी को भी तय समय में बाल सुधार गृह में मिलने की अनुमति दी।
कोर्ट के फैसले के बाद लगाई छलांग
कोर्ट के फैसले से दुखी लड़की ने अदालत की बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर से छलांग लगा दी। पुलिस ने तुरंत लड़की को राजीव गांधी जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। लड़की की स्थिति अब स्थिर है। इस मामले में 28 अगस्त को सुनवाई होगी।

