Meta का बड़ा कदम: चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर रिपोर्टिंग सिस्टम मजबूत करेगा; सरकार की सख्ती के बाद कदम
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नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने 9 सितंबर को मेटा इंडिया को समन भेजा था। इसमें बच्चों से जुड़ी कंटेंट की जानकारी मांगी गई थी।
नेशनल डेस्क. फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी शेयर करने के लिए सहमत हो गया है। अब यह जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बच्चों से जुड़े केस में काम आएगी। मंगलवार को अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
सरकार ने कहा- सरकार हार्मफुल कंटेंट रोकने और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के सिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म के साथ मिलकर काम कर रही है। Meta ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी को लेटर भेजा है।
सरकार ने इसे पहला कदम बताया
सरकार ने कहा- भारत में ऑपरेट होने वाले हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म का बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी सिद्धांत है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार ने मेटा के इस कदम को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पहला स्टेप बताया है। हालांकि इसमें अभी बहुत कुछ किए जाने की जरुरत है।
दूसरे प्लेटफार्म भी सरकार की निगरानी में
सरकार की तरफ से कहा गया है कि वह अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के साथ भी मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कंटेंट की पहचान करके उसे हटाया जा सके। उन्होंने कहा- बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कदम न उठाने वाले किसी भी प्लेटफार्म के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दरअसल, नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने 9 सितंबर को मेटा इंडिया को समन भेजा था। इसमें बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) वाले कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में जानकारी मांगी थी।
यह ऐसे समय में हुआ है जब सरकार डिजिटल प्लेटफार्म की जवाबदेही बेहतर बनाने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रही है। इसमें ऑनलाइन हार्मफुल कंटेंट खासकर बच्चों पर असर डालने वाले कंटेंट को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना शामिल है।

